What is the meaning of the name of Lord Shiva?

Lord Shiva Shankar Bholanath Shiva Meaning


Lord Shiva Meaning  Shankar Bholanath

Other Names of Shiv :

Mahadev, Shankar, Shambhu, Neelkantha, Bholanath, Kailashpati, Umapati, Rudra, Ishaan, Ishwara and hundreds more.

Lord Shiva Shankar Bholanath Shiva Meaning

Other forms: Shiva-Linga, Nataraj, Ardha-narishwara, Dakshinamurti.

Significance: Shiva is one of the three main aspects of the supreme/divine, the other two being Brahma and Vishnu. Shiva means auspiciousness. Shiva represents the principle of dissolution. Everything in the universe that has a name or a form is perishable. Shiva is the original cause process working that makes dissolution possible. Due to this, he at times is incorrectly referred to as the God of destruction. Dissolution is a necessary process or creation.

Lord Shiva Shankar Bholanath Shiva Meaning

Shiva is depicted in a sitting, meditative pose, or in a family setting with consort Parvati and sons Ganesh and Kartikeya and surrounded by Nandi (Bull) and Ganas. Shiva is the God with utter simplicity and austerity. His clothes, sacred ash (Vibhuti) smeared on the body, long hair tied together in a knot, snakes around the neck and His arms are decorated. He is an embodiment of Tapas, Vairagya, and Knowledge. He is always meditating on the welfare of the universe. What do all of these means to us?

Lord Shiva Shankar Bholanath Shiva Meaning

Ganga symbolizes Child-Shakti (pure consciousness, wisdom) or knowledge flowing from heaven to earth. She comes down to Earth through Shiva (auspiciousness). Wisdom descends only through the medium of auspiciousness. The crescent moon symbolizes complete control over mind and the third eye, which is usually closed, symbolizes pure Knowledge which burns away all dualities when opened. Sacred ash on the body signifies spiritual wealth left over after dissolution of all worldly desires. The blue neck of Shiva points to his extreme compassion for the world. He is holding poison in the neck and not completely swallowing it.

Lord Shiva Shankar Bholanath Shiva Meaning
Bholanath

Trishula (trident) shows that he is beyond three Gunas (sattva, rajas, tamas), beyond three states of consciousness, and beyond past, present, and future. Beats of Damaroo (drum) set the cosmic rhythm by which the universe maintains its dynamic harmony and balance. The snake is a representation of Kundalini Shakti (mystic spiritual energy) and also represents a poisonous animal. Shiva was immune to its poison. Nandi (bull) is a vehicle of Shiva and signifies Dharma as well as pure Ananda (joy). Tigerskin represents slain ego (Ahankar) and control over all lower nature.

Lord Shiva Shankar Bholanath Shiva Meaning
Shankar

In the form of Dakshinamurti, Shiva is a universal teacher who imparts knowledge by silence.  In the form of Nataraj, dancing Shiva represents the cosmic laws of the dynamic universe –a universe continuously in motion but not out of balance. In the form of Ardha-Nareeshwara, Siva represents simultaneously both male and female principle working together to manifest the universe. In the form of Linga, Shiva is depicted as form-less ultimate reality, the self who is fully absorbed in his own self. There is twelve famous and ancient jyotirlinga spread across India.

Lord Shiva Shankar Bholanath Shiva Meaning
Lord Shiva

There is an ancient saying:       Shivam Bhutva Shivam Yajet, which can be generally translated as “meditate on become like Shiva”. In the famous shloka of ‘Shiva Mansa pooja’ connection of Shiva to ourselves is made clear: my own atman is Shiva, my own pure Budhhi is Parvati, my own prana is nothing cut Ganas, and my own Body is Shiva’s abode….and there for whatever I do let it be an offering of pooja to Shiva (my own Atman). An image of Shiva once understood in its true sense, can be a source of great inspiration for all to improve themselves. 

Lord Shiva Shankar Bholanath Shiva Meaning

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क्यों करें घर में गणेश विसर्जन?


श्री गणेश के लाखों भक्त है और गणेश चतुर्थी के उपलक्ष्य में भारत वर्ष के लगभग हर घर में गणपति जी की स्थापना की जाती है। हर घर गणेश, घर घर गणेश।

और जैसे की स्थापना की जाती है वैसे ही चतुर्थी की समाप्ति पर सभी भक्त गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन भी करते हैं। गणेश विसर्जन प्रतिक है बदलाव का।

किन्तु विसर्जन की प्रक्रिया में हम सभी को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए की हमने केवल इको-फ्रेंडली प्रतिमा ही स्थापित की हो जो की पर्यावरण को नुकसान न पहुँचाए।

इको-फ्रेंडली प्रतिमा पर्यावरण के लिए तो अच्छी होती ही है साथ ही हमे भी श्री गणेश के आशीर्वाद को सदा के लिए हमारे पास रखने की आज़ादी भी प्रदान करती है।

आईये बताते हैं कैसे – अगर आप इको-फ्रेंडली प्रतिमा नहीं लये हैं तो विसर्जन करने के लिए आपको बाहर ही जाना होगा क्यूंकि प्लास्टर ऑफ पैरिस से बनी प्रतिमा कभी भी पानी में नहीं गलती, किन्तु इको-फ्रेंडली प्रतिमा आप चाहें तो अपने घर में ही विसर्जित कर सकते हैं क्यूंकि यह तुरंत ही पानी में घुल के मिटटी में परिवर्तित हो जाती है।

प्रतिमा से प्राप्त मिट्टी को हम चाहें तो गमले में रख कर उसमे पौधा रोप सकते हैं और श्री गणेश का आशीर्वाद सदा के लिए हमारे घर में रहेगा। 

घर में करें गणेश विसर्जन की विधि 

गणेश विसर्जन

आपके द्वारा स्थापित की गयी गणेश प्रतिमा के आकृति और आकर के अनुसार बर्तन, बाल्टी, टब, ड्रम, टंकी आदि का चुनाव करें 
– उससे किसी साफ़ स्वच्छ स्थान पर रखें 
– सुनिश्चित करें की बर्तन, बाल्टी, टब, ड्रम, टंकी आदि बिलकुल साफ हो 
– इसमें बिल्कुल स्वच्छ जल भरें 
– जल में थोड़े से सुगन्धित फूल डालें, हो सके तो दो बूँद इत्र भी डालें 
– पास ही अगरबत्ती और धुप लगायें 
– पास ही एक पाट रखें और उस पर आसान बिछाएँ 
– श्री गणेश की पूजा कर धूम धाम से उन्हें विसर्जन स्थल तक लाएँ 
– ॐ गम गणपतये नमः का जब करें और पाट पर श्री गणेश को बिठायें 
– पूरी श्रद्धा से गणपति की पूजा करें और परिवार की मंगल कामना करें 
– नैवेध प्रसूतु कर नारियल बड़ा करें 
– श्री गणेश से आग्रह करें की अगले वर्ष वे फिर आपके घर पधारे और आपको सुख समृद्धि प्रदान करें 
– श्री गणेश की आरती करें 
– सभी लोग हाथ लगा कर धीरे से श्री गणेश की प्रतिमा को पानी में छोड़ दें 
– गणपति बपा मोरया का उदघोष करें 

कुछ समय में आपके द्वारा विसर्जित इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा मिट्टी के रूप में परिवर्तित हूँ जाएगी। मिटटी से पानी अलग कर लें और मिट्टी को गमले में डाल कर उसमें पौधा रोप दें। 

गणेश विसर्जन

जय गणेश 
हर घर गणेश, घर घर गणेश।


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हनुमान


श्री हनुमान चालीसा

-: दोहा :-
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमनु मुकुरु सुधारि
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार



हनुमान जी की आरती

आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

जाके बल से गिरिवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके।।


श्री शनि देव

Jagannathv
शनि चालीसा

॥दोहा॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज ।करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥

Jagannathv
शनि कवचं

अथ श्री शनिकवचम्
अस्य श्री शनैश्चरकवचस्तोत्रमंत्रस्य कश्यप ऋषिः IIअनुष्टुप् छन्दः II शनैश्चरो देवता II शीं शक्तिः II शूं कीलकम् II शनैश्चरप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः IIनिलांबरो नीलवपुः किरीटी गृध्रस्थितस्त्रासकरो धनुष्मान् II

श्री राम

Jagannathv

श्री राम चालीसा

श्री रघुवीर भक्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
निशिदिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहिं होई॥1॥
ध्यान धरे शिवजी मन माहीं। ब्रह्म इन्द्र पार नहिं पाहीं॥
दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहूं पुर जाना॥2॥

Jagannathv

आरती श्री राम जी

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।
नव कंज लोचन, कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन
कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्।
पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचि