Vasant Panchami worship Saraswati

Vasant Panchami 2020


why do we celebrate vasant panchami

Vasant Panchami  is on Wednesday 29 January 2020. On the day of Vasant Panchami 2020, Goddess Saraswati is worshiped and is asked to give special boon for knowledge, education, intelligence, and speech. White and yellow flowers are very important in the worship of Mother Saraswati. Special events are organized in the schools, colleges, and educational institutions on the occasion of Vasant Panchami.

Vasant Panchami
Vasant-Panchami-2020

Pooja process to worship Saraswati on occasion of Vasant Panchami 

– In the auspicious time of Vasant Panchami sit in a quiet place or temple facing east direction

– Put a barrel of wood in front of you. Spread white clothes on the Bajot and paint a picture of Saraswati Devi on it

– Place a copper plate on that bayage. If there is no copper plate, then you keep plate made of other material

– In this plate, add a lump of rice with uncut or saffron rice.

– Now, establish the Saraswati Yantra, proven in the prana-reputable and conscious auspicious muhurut on these spread Rice

– After this, ‘Saraswati’ should have a bath with Panchamrath. First give her bath from milk, then with ghee, then with curd, then with sugar and later with honey

Tilak the Saraswati Yantra and the picture with saffron or kumkum

– After this, offer sweet made of milk to Godess

– Now close eyes and meditate of Mother Saraswati and chant the 11 mala of following mantra from Saraswati Mala

|| ॐ श्री ऐं वाग्वाहिनी भगवती सन्मुख निवासिनि सरस्वती ममास्ये प्रकाशं कुरू कुरू स्वाहा: ||

– Pray for education, fast remembrance, riddhi-siddhi, power etc. for you and your children from Mother Saraswati and complete the pooja

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जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज ।करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥

Jagannathv
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अथ श्री शनिकवचम्
अस्य श्री शनैश्चरकवचस्तोत्रमंत्रस्य कश्यप ऋषिः IIअनुष्टुप् छन्दः II शनैश्चरो देवता II शीं शक्तिः II शूं कीलकम् II शनैश्चरप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः IIनिलांबरो नीलवपुः किरीटी गृध्रस्थितस्त्रासकरो धनुष्मान् II

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श्री रघुवीर भक्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
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ध्यान धरे शिवजी मन माहीं। ब्रह्म इन्द्र पार नहिं पाहीं॥
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आरती श्री राम जी

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।
नव कंज लोचन, कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन
कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्।
पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचि