Somnath Temple | सोमनाथ | Somnath | Ghumteganesh.com

सोमनाथ | Somnath

Somnath Temple


सोमनाथ मंदिर | Somnath temple

Somnath Temple

somnath temple
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग वेरावल गुजरात

१२ ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान सोमनाथ मंदिर ज्योतिर्लिंग को प्राप्त है। शिव पुराण के अनुसार चन्द्रमा, राजा दक्ष प्रजापति के दामाद थे और उनका विवाह दक्ष प्रजापति की २७ बेटियों से हुआ था।

चन्द्रमा रोहिणी नाम की बेटी से सबसे ज़्यादा प्यार करते थे और यह कारण राजा दक्ष की बाकि २६ बेटियों पर बिलकुल भी ध्यान नहीं देते थे।

काफी समय देखने गुजरने के बाद भी जब चन्द्रमा के व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आया तो एक दिन दक्ष प्रजापति ने चन्द्रमा को इस विषय पर बात करने के लिए बुलाया। चन्द्रमा से उन्होंने आग्रह किया की वे बाकि २६ पत्नियों पर भी ध्यान दें।

यह बात चन्द्रमा को पसंद नहीं आयी और उन्होंने अपनी २६ पत्नियों का त्याग करने की बात दक्ष प्रजापति को बोली और दोनों के बीच विवाद हो गया।

चन्द्रमा अपनी बाद पर अड़े रहे और जैसे ही रोहिणी को लेकर जाने को हुऐ दक्ष प्रजापति ने उन्हें श्राप दिया की चन्द्रमा अपनी साडी चमक को देगा और उसका अस्तित्व ही ख़त्म हो जायेगा।

श्राप मिलते ही चन्द्रमा अंधकारमय हो गया और दिखाई भी नहीं देने लगा। ऐसा होते है चन्द्रमा अपनी पत्नी रोहिणी के साथ सोमनाथ आये और स्पार्स लिंगम की पूजा में लीन हो गए।

उनकी भक्ति से प्रसन्न हो कर शिव जी ने चन्द्रमा को आशीर्वाद दिया की वह पुनः अपने स्वरुप में लौट पायेगा किन्तु दक्ष प्रजापति के श्राप का भी मान रखना होगा और उसी के चलते चन्द्रमा का स्वरूप एक सा नहीं रहेगा।

चन्द्रमा रोज अपना स्वरूप बदलेगा और १ माह में एक बार पूर्ण रूप से लुप्त हूँ जायेगा और १ बार ही पूर्ण रूप से चमक पायेगा। चन्द्रमा ने शिव जी का आभार माना और उनसे सोमनाथ में ही निवास करने का आग्रह किया, शिव जी ने आग्रह स्वीकार किया और सोमचंद्र नाम भी ग्रहण किया।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग ने कई आक्रमण झेले और अतीत में कई बार मुस्लिम आक्रमणकारी शासकों और पुर्तगालियों द्वारा बार-बार इस मंदिर को ध्वस्त किया गया और नुकसान पहुँचाया गया।

मई १९५१ में सोमनाथ मंदिर वास्तुकला की चालुक्य शैली में वापस से बनाकर तैयार किया गया और आज भी अपने इसी स्वरूप में देखा जा सकता है। स्वतंत्र भारत के पहले ग्रह मंत्री श्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के निर्देशों के अनुसार पुनर्निर्माण शुरू किया गया था।

Somnath Jyotirlinga Vareval Gujarat

Somnath Temple Jyotirlinga occupies first place out of 12 Jyotirlingas. According to Shiv Purana, Moon (Chandrama) was the son-in-law of King Daksha Prajapati and was married to 27 daughters of Daksha Prajapati.

Moon (Chandrama) used to love Rohini the most out of his 27 wives and did not give due attention to the remaining 26 daughters of King Daksh.

Even after passing a considerable amount of time, when there was no change in behavior of Moon (Chandrama), one day Dakra Prajapati called Moon (Chandrama) to talk about this subject. He requested Moon that he should pay attention to the other 26 wives also.

This thing was not liked by Moon, and it was a matter of dispute between Dave Prajapati. Moon (Chandrama) decided to sacrifice all his 26 wifes and move ahead with Rohini.

The moon remained firm on his decision to sacrifice his 26 wives, on this decision Daksh Prajapati cursed him that Moon will lose all his shine and radiance and that its existence will end. Soon due to the curse Moon became dark and did not even appear.

Moon (Chandra) went came to Somnath with his wife Rohini, and became absorbed in the worship of Parsa Lingam. Pleased with his devotion, Shiva blessed Moon, that he would be able to return to his form, but as the curse of Daksha Prajapati must also be respected and due to that the nature of the moon will not be the same.

Moon will change its form every day and once in a month it will completely disappear and will be able to completely shining only 1 time in a span of a month. Chandra considered gratitude to Shiva and urged him to reside in Somnath, Shiva accepted the request and also took the name of Somchandra.

Somnath Jyotirlinga has suffered many attacks and many times in the past. Many times this temple was demolished and damaged by Muslim invaders and the Portuguese. In May 1951, the Somnath Temple was reconstructed in the Chalukya style of architecture and it can still be seen in its form. Reconstruction was started as per the instructions of the first home minister of independent India, Sardar Vallabh Bhai Patel.

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