Teen Ankhowale ganesha ka mandir  ( राजस्थान सवाई माधोपुर )


Teen Ankhowale ganesha ka mandir

Teen Ankhowale ganesha ka mandir

यह स्वयंभू गणपति रणथंभौर जंगल में एक पहाड़ की चट्टान से प्रकट हुआ है जो समुद्र तल से 2000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।

यह मन्दिर स्वयंभु इसलिए कहा जाता है क्यूंकि मंदिर में पूजी जाने वाली प्रतिमा किसी कलाकार द्वारा है नहीं बनाई गयी है, बल्कि श्री गणेश का चेहरा और की सूंड का एक हिस्सा पहाड़ से अपने आप उत्पन्न हुआ  है।

गणेश की आकृति के दोनों ओर उनके बेटे शुभ और लाभ और उनके साथ श्री गणेश की पत्नियाँ रिद्धि और सिद्धि भी दिकहि पड़ती हैं। श्री गणेश के पुरे परिवार के दर्शनों को यहाँ पांच देवता का दर्शन कहा जाता है। तीन आंखों वाले श्री गणेश का मंदिर ( Teen Ankhowale ganesha ka mandir )के पुजारियों के अनुसार गणपति की तीसरी आँख बुद्धि का प्रतिनिधित्व करती है। श्री विष्णु की एक मूर्ति श्री गणेश के सामने है।

Teen Ankhowale ganesha ka mandir
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इस तीन आंखों वाले श्री गणेश का मंदिर के पीछे के इतिहास के अनुसार, यह कहा जाता है कि 1299 ईस्वी में रणथंभौर किलेबंदी में राजा हम्मीर और अलाउद्दीन खिलजी के बीच युद्ध हुआ था। युद्ध के समय जहां राजा रहता था, खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक चीजों के साथ गोदामों को भरते थे ताकि युद्ध में इन चीजों का आभाव ना हो ।

युद्ध कई वर्षों तक चला और  गोदामों में संग्रहीत चीजें खत्म होने लगी । राजा हैमर भगवान गणेश के बहुत बड़े भक्त थे। एक रात जब वह सो रहे थे तो, भगवान गणेश उनके सपने में आए और कहा कि कल सुबह तक सभी कमी और समस्याएं खत्म हो जाएंगी।

अगले दिन सुबह, किले की एक दीवार से तीन आँखों (त्रिनेत्र) के साथ भगवान गणेश (Lord Ganesh)की एक मूर्ति उभर आयी। साथ ही चमत्कार के साथ युद्ध समाप्त हो गया, जबकि गोदाम फिर से भर गए। 1300 ई। में, राजा हैमर ने भगवान गणेश का मंदिर बनवाया।

उन्होंने भगवान गणेश की मूर्ति, ऋद्धि सिद्धि (उनकी पत्नी) और दो पुत्रों (शुभ लभ) को मूर्ति (मूषक, उनका वाहन) की मूर्ति के साथ रखा।

Teen Ankhowale ganesha ka mandir
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सवाईमाधोपुर  (Sawai Madhopur) देश में जगह-जगह आस्था और विश्वास के अद््भुद उदहारण देखने को मिलता है। आज के जमाने में जहां इंटरनेट, ई-मेल और फोन का चलन है। वहां एक ऐसी भी जगह है, जहां लाखों की तादाद में चिट्ठियां भेजी जाती हैं।

यह चिट्ठियां किसी इंसान को नहीं, बल्कि गणनायक भगवान गणेश को भेजी जाती हैं।जी हां, राजस्थान के रणथंभौर में त्रिनेत्र गणेश मंदिर ऐसा है, जहां गणपति को हर शुभ काम से पहले चिट््ठी भेजकर निमंत्रण दिया जाता है। ऐसे में यहां हमेशा भगवान के चरणों में चिट्ठियो और निमंत्रण पत्रों का ढेर लगा रहता है।

यात्री राधामोहन शर्मा व ज्योतिस्वरूप ने बताया कि रणथम्भौर त्रिनेत्र गणेश मंदिर में पूरे देशभर से श्रद्धालु आते हैं। घर में होने वाले हर मांगलिक कार्य का पहला कार्ड यहां भगवान गणेश के नाम भेजते है। गणेश चतुर्थी पर हर वर्ष यहां बड़ी संख्या में दर्शनार्थी आते है।

मंगल कार्य में भेजते है कार्ड
राजस्थान के सवाईमाधोपुर से लगभग 10 किलोमीटर दूर रणथंभौर के किले में बना गणेश मंदिर भगवान को चिट्ठियां भेजे जाने के लिए जाना जाता है। यहां के लोग घर में हर मंगल कार्य के पहले रणथंभौर गणेश जी के नाम कार्ड भेजना नहीं भूलते हैं।

यह मंदिर 10वीं सदी में रणथंभौर के राजा हम्मीर ने बनवाया था। कहा जाता है कि युद्ध के दौरान राजा के सपने में गणेश जी आए थे और उन्हें आशीर्वाद दिया। इसके बाद युद्ध में राजा की विजय हुई, तब उन्होंने अपने किले में मंदिर का बनवाया था।

विराजते हैं त्रिनेत्री भगवान गणेश
यहां भगवान गणेश की मूर्ति बाकी मंदिरों से कुछ अलग है। मूर्ति में भगवान की तीन आंखे है। गणेश जी अपनी पत्नी रिद्धि-सिद्धि और अपने पुत्र शुभ-लाभ के साथ विराजमान है। यहां गणेश चतुर्थी पर धूमधाम से उत्सव मनाया जाता है और विशेष पूजा अर्चना की होती है।

पढ़कर रखते है गणेशजी के चरणों में
देश के कई लोग हर मंगल कार्य का पहला कार्ड यहां भगवान गणेश के नाम भेजते है। कार्ड पर पता लिखा जाता है।

श्री गणेश जी, रणथंभौर का किला जिला. सवाई माधोपुर डाकिया भी इन चिट्ठियां को पूरी श्रद्धा और सम्मान से मंदिर में पहुंचा देता है। इसके बाद पुजारी चिट्ठियां को भगवान गणेश के सामने पढ़कर उनके चरणों में रख देते है।

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क्यों करें घर में गणेश विसर्जन?


श्री गणेश के लाखों भक्त है और गणेश चतुर्थी के उपलक्ष्य में भारत वर्ष के लगभग हर घर में गणपति जी की स्थापना की जाती है। हर घर गणेश, घर घर गणेश।

और जैसे की स्थापना की जाती है वैसे ही चतुर्थी की समाप्ति पर सभी भक्त गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन भी करते हैं। गणेश विसर्जन प्रतिक है बदलाव का।

किन्तु विसर्जन की प्रक्रिया में हम सभी को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए की हमने केवल इको-फ्रेंडली प्रतिमा ही स्थापित की हो जो की पर्यावरण को नुकसान न पहुँचाए।

इको-फ्रेंडली प्रतिमा पर्यावरण के लिए तो अच्छी होती ही है साथ ही हमे भी श्री गणेश के आशीर्वाद को सदा के लिए हमारे पास रखने की आज़ादी भी प्रदान करती है।

आईये बताते हैं कैसे – अगर आप इको-फ्रेंडली प्रतिमा नहीं लये हैं तो विसर्जन करने के लिए आपको बाहर ही जाना होगा क्यूंकि प्लास्टर ऑफ पैरिस से बनी प्रतिमा कभी भी पानी में नहीं गलती, किन्तु इको-फ्रेंडली प्रतिमा आप चाहें तो अपने घर में ही विसर्जित कर सकते हैं क्यूंकि यह तुरंत ही पानी में घुल के मिटटी में परिवर्तित हो जाती है।

प्रतिमा से प्राप्त मिट्टी को हम चाहें तो गमले में रख कर उसमे पौधा रोप सकते हैं और श्री गणेश का आशीर्वाद सदा के लिए हमारे घर में रहेगा। 

घर में करें गणेश विसर्जन की विधि 

गणेश विसर्जन

आपके द्वारा स्थापित की गयी गणेश प्रतिमा के आकृति और आकर के अनुसार बर्तन, बाल्टी, टब, ड्रम, टंकी आदि का चुनाव करें 
– उससे किसी साफ़ स्वच्छ स्थान पर रखें 
– सुनिश्चित करें की बर्तन, बाल्टी, टब, ड्रम, टंकी आदि बिलकुल साफ हो 
– इसमें बिल्कुल स्वच्छ जल भरें 
– जल में थोड़े से सुगन्धित फूल डालें, हो सके तो दो बूँद इत्र भी डालें 
– पास ही अगरबत्ती और धुप लगायें 
– पास ही एक पाट रखें और उस पर आसान बिछाएँ 
– श्री गणेश की पूजा कर धूम धाम से उन्हें विसर्जन स्थल तक लाएँ 
– ॐ गम गणपतये नमः का जब करें और पाट पर श्री गणेश को बिठायें 
– पूरी श्रद्धा से गणपति की पूजा करें और परिवार की मंगल कामना करें 
– नैवेध प्रसूतु कर नारियल बड़ा करें 
– श्री गणेश से आग्रह करें की अगले वर्ष वे फिर आपके घर पधारे और आपको सुख समृद्धि प्रदान करें 
– श्री गणेश की आरती करें 
– सभी लोग हाथ लगा कर धीरे से श्री गणेश की प्रतिमा को पानी में छोड़ दें 
– गणपति बपा मोरया का उदघोष करें 

कुछ समय में आपके द्वारा विसर्जित इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा मिट्टी के रूप में परिवर्तित हूँ जाएगी। मिटटी से पानी अलग कर लें और मिट्टी को गमले में डाल कर उसमें पौधा रोप दें। 

गणेश विसर्जन

जय गणेश 
हर घर गणेश, घर घर गणेश।


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हनुमान


श्री हनुमान चालीसा

-: दोहा :-
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमनु मुकुरु सुधारि
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार



हनुमान जी की आरती

आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

जाके बल से गिरिवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके।।


श्री शनि देव

Jagannathv
शनि चालीसा

॥दोहा॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज ।करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥

Jagannathv
शनि कवचं

अथ श्री शनिकवचम्
अस्य श्री शनैश्चरकवचस्तोत्रमंत्रस्य कश्यप ऋषिः IIअनुष्टुप् छन्दः II शनैश्चरो देवता II शीं शक्तिः II शूं कीलकम् II शनैश्चरप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः IIनिलांबरो नीलवपुः किरीटी गृध्रस्थितस्त्रासकरो धनुष्मान् II

श्री राम

Jagannathv

श्री राम चालीसा

श्री रघुवीर भक्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
निशिदिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहिं होई॥1॥
ध्यान धरे शिवजी मन माहीं। ब्रह्म इन्द्र पार नहिं पाहीं॥
दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहूं पुर जाना॥2॥

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आरती श्री राम जी

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।
नव कंज लोचन, कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन
कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्।
पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचि