घुमतेगणेश.कॉम

Rani Sati Chalisa

॥ Doha ॥

Sri Guru Pad Pankaj Naman, Dushit Bhav Sudhar,
Ranisati Suvimal yash, Barnau Mati Anusar,
Kaam Krodh mad lobh me, Bharam rahyo sansar,
Sharan gahi karunamayi, Sukh sampatti sanchar॥

॥ Chaupai ॥

Namo Namo Sri Sati Bhavani, Jag vikhyat sabhi man manni।
Namo Namo Sanktakun harni, mann vanchit pura sab karni॥

Namo Namo jai jai Jagdamba, bhaktan kaaj na hoy vilamba।
Namo Namo jai jai Jagtarini, sevak jann ke kaaj sudharini॥

Divya roop sir chundar sohe, jagmagat kundal mann mohe।
Maang sindoor sukajal tikki, gaj mukta nath sundar niki॥

Gale baijanti maal biraje, solah saaj badan pe saaje।
Dhanya bhaag Gursamal jee ko, maham dokva janam Sati ko॥

Tandhan Das pativar paaye, anand mangal hot savaye।
Jaliram putra vadhu hoke, vansh pavitra kiya kul doke॥

Pati Dev Rann maay jhunjhare, Sati roop ho shatru sanghare।
Pati Sang le sadgati paayi, surr mann harsh suman barsai॥

Dhanya dhanya uss Ranajee ko, sufal hua kar daras Sati ko।
Vikram terah so bavanku, mangsir badi Naomi Mangal ku॥

Nagar Jhunjhnun pragati Maata, jag vikhyat sumangal daata।
Durr desh ke yatri aave, dhoop deep navaidya chadave॥

Uchad uchad te hain anand se, pooja tan man dhan srifal se।
Jaat jadula raat jagave, bansal goti sabhi manave॥

Poojan path pathan dvij karte,ved dhwani mukh se ucharte।
Nana bhanti bhanti pakwana,vipra jano ko nyut jimana॥

Sradha bhakti sahit harshate, sevak mann vanchit phal paate।
Jai jai kar kare narr naari, Sri Ranisati ki balihari॥

Dwar kot nit naubat baaje, hot sringar saaj ati saaje।
Ratna Singhasan jhalke niko, pal pal chin chin dhyan Sati ko॥

Bhadra krishna mavas din leela, bharta mela rang rangeela।
Bhakt sujanki sakad bheed hai, darshanke hit nahin chid hai॥

Atal bhuvan me jyoti tihari, tej punj jag mayin ujari।
Adi Shakti me mili jyoti hai, desh desh me bhavan bhoti hai॥

Nana vidhi so puja karte, nish din dhyan tihara dharte।
Kashta nivarani,dukkh nashini, karunamayi Jhunjhnun vasini॥

Pratham Sati Narayani nama, dwadas aur hui issi dhaama।
Tihun lok me kirti chayi, Sri Rani Sati ki phiri duhai॥

Subah shaam Aarti utare, naubat ghanta dhwani tankare।
Raag chattison baaja baaje, terahun mand sundar ati saaje॥

Trahi Trahi me sharan aapki, poori mann ki aas daas ki।
Mujhko ek bharoso tero, aan sudharo karaj mero॥

Pooja jap tap nem na jaanu, nirmal mahima nitya bakhanu।
Bhaktan ki aapati har leni, putra pautra sampati var deni॥

Padhe yeh Chalisa jo shat baara, hoy siddhi mann mahi bichara।
Sagla bhakta sharan li thari, kshama karo sab chuk hamari॥

॥ Doha ॥

Dukh aapad tavpada haran, Jagjivan adhar।
Bigdi baat sudhariye, Sab apradh bisar॥


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दक्षिण भारत में गंगा लाये गणपति 

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आमंत्रण
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कहाँ कहाँ जायेंगे
कहाँ कहाँ जायेंगे

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श्री हनुमान चालीसा

-: दोहा :-
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हनुमान जी की आरती

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श्री शनि देव

Jagannathv
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॥दोहा॥
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Jagannathv
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अथ श्री शनिकवचम्
अस्य श्री शनैश्चरकवचस्तोत्रमंत्रस्य कश्यप ऋषिः IIअनुष्टुप् छन्दः II शनैश्चरो देवता II शीं शक्तिः II शूं कीलकम् II शनैश्चरप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः IIनिलांबरो नीलवपुः किरीटी गृध्रस्थितस्त्रासकरो धनुष्मान् II

श्री राम

Jagannathv

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श्री रघुवीर भक्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
निशिदिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहिं होई॥1॥
ध्यान धरे शिवजी मन माहीं। ब्रह्म इन्द्र पार नहिं पाहीं॥
दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहूं पुर जाना॥2॥

Jagannathv

आरती श्री राम जी

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।
नव कंज लोचन, कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन
कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्।
पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचि