Navratri kya hai 2020 ?

Navratri kya hai

दुर्गा माँ के नौ अवतारों की नौ दिन तक पूजा जाता है। Saturday 17 अक्टूबर और 25अक्टूबर के बीच आने वाली अमावस्या के दिन से नवरात्रि 2020 ( Navratri kya hai )की शुरुवात होती है। यह भारत का एक बहुत ही महत्वपुर्ण त्यौहार है और पुरे भारतवर्ष में अनेकों प्रारूपों मनाया जाता है। पूर्वी एशिया में यह नौवें चन्द्र महीने के नौवें दिन के आसपास शुरू होता है। 

नवरात्रि 2019 शरद ऋतु उत्सव का हिस्सा है जो कई नामों से जाना जाता है। चीन में यह त्यौहार को ‘नौ सम्राट भगवानों के त्यौहार’ के नाम से जाना जाता है।

भारत में भी नवरात्री उत्सव को मनाने के तरीकों में थोड़ी बहुत विविधता पाई जाती है किन्तु मुल रूप से यह एक कला उत्सव है और बुराई पर अच्छाई का उत्सव है। इसे देश के विभिन्न हिस्सों में गरबा-डांडिया, रामलीला, गोलू और दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है।

 

Navratri kya hai
Navratri kya hai

नवरात्रि 2019 के दौरान दुर्गा माँ के नौ रूपों को पूजा जाता है और मूल रूप से यह महिलाओं की शक्तियों को याद दिलाने वाला एक त्यौहार है। नवरात्री महिला केन्द्रित त्यौहार है
और महिलाएँ मुख्य भुमिका में होती हैं यह स्त्री गुणों का उत्सव है जैसे संगीत, नृत्य, श्रृंगार आदि।

पूर्वी भारत में नवरात्रि 2019 को “दुर्गा पूजा” कहा जाता है और बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार दुर्गा देवी ने दानव पर विजय प्राप्त की और यह उसी जित का त्यौहार है।

सिर्फ पूर्वी भारत ही नहीं “दुर्गा पूजा” बांग्लादेश जो की एक इस्लामिक देश है वहां भी दुर्गा उत्सव के दौरान जगह जगह पंडाल देके जा सकते है और लोग दुर्गा पूजा को बड़ी ही श्रद्धा के साथ मानते हैं।  

Navratri kya hai
Navratri kya hai

पश्चिमी भारत ने दुर्गा पूजा को सही मायने में उत्सव का रूप दिया है। पश्चिमी भारत में उत्सव को डांडिया रास बोला जाता है और सभी लोग माता की भक्ति में पुरे नौ दिन  रात को गरबा करते हैं।

आज अगर भारत के किसी उत्सव को पुरे विश्व में ख्याति प्राप्त है तो वो है गरबा।

तमिलनाडु में गोलू कहा जाता है। त्यौहार के दौरान लोग घरों में  पौराणिक कथाओं और जीवन की अच्छी सिखों को दर्शाती हुई झाँकियाँ प्रदर्शित करते हैं। लकड़ी या लोहे की सीढी पर मूर्तियाँ प्रदर्शित की जाती हैं।

सभी लोग अपनी रचनात्मकता के अनुसार झाँकियाँ प्रदर्शित करते है जो की पौरणित या आधुनिक दोनों ही हूँ सकती हैं।

कर्नाटक में ऐसे एक शाही त्यौहार का दर्जा हासिल है और मैसूर में पौराणिक महल को अत्यधिक सजाया जाता है। 

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