नरक चतुर्दशी पूजा विधि [ दूसरा दिन ] : दीवाली 2020

Narak chaturdashi puja vidhi

Narak chaturdashi puja vidhi

धनतेरस के बाद दिवाली के दूसरे दिन आने वाली नरक चतुर्दशी को पुरे भरता में एक महत्वपूर्ण दिन के रूप में मनाया जाता है। नरकासुर के खिलाफ भगवान कृष्ण की जीत के लिए नरक चतुर्दशी मनाई जाती है और इसलिए इस दिन को नरक चतुर्दशी कहते है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, धरती माता का पुत्र नरकासुर एक दुष्ट असुर बन गया, जिसने अपने शासन में कई राज्यों पर शासन किया।

भगवन विष्णु ने कृष्ण के रूप में धरती पर अवतार लिया है | और भगवान इंद्र भगवान विष्णु से प्रार्थना करते हैं की वह नरकासुर का वध कर दे ,जो की अभी कृष्ण के रूप में धरती पर अवतार में है , वह अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ अपने गरुड़ की सवारी करते हुए नरकासुर पर हमला करते हैं और सुदर्शन चक्र से नरकासुर का वध करते हैं।

एक अन्य पैराणिक कथा के नुसार , यह कहा जाता है कि नरकासुर को भगवान ब्रह्मा द्वारा वरदान दिया गया था | वरदान यह था की उसका वध केवल एक महिला के हाथों से ही होगा। इसलिए युद्ध में, भगवान कृष्ण की पत्नी सत्यभामा है जो कृष्ण के साथ उनकी सारथी के रूप उपस्तिथ थी ।

तो इस दिन के लिए अनुष्ठानों में एक कड़वा फल तोड़ना शामिल है। कड़वा फल नरकासुर की हार का प्रतीक है। दशहरे की तरह, नरकासुर की हार हमें याद दिलाती है कि अच्छाई हमेशा बुराई पर जीत हासिल करती है।

पश्चिम बंगाल में, इस दिन को काली चौदस के रूप में जाना जाता है। यह दिन देवी काली के हाथों नरकासुर की हार का प्रतीक है।

महाराष्ट्र में, परिवार इस दिन को सुबह जल्दी उठने और ‘उबटन’ के साथ अभ्यंग स्नान करने के मनाते हैं। यह उबटन चन्दन, अम्बे हलदी, मुल्तानी मिट्टी, ख़ुश, रोज़, बेसन आदि का मिश्रण है। लोग सुबह-सुबह मंदिर जाकर भगवान की पूजा करते हैं और पटाखे फोड़ते हैं।

दक्षिणी भारत में, लोग जल्दी उठते हैं और पवित्र स्नान करते हैं। फिर वे कुमकुम और तेल का पेस्ट बनाते हैं और इसे अपने माथे पर लगाते हैं। तमिलनाडु में कुछ समुदाय इस दिन लक्ष्मी पूजा करते हैं।

गोवा में, दिन दशहरा की तरह मनाया जाता है। अंतर केवल इतना है कि यहां रावण की जगह नरकासुर के पुतले बनाकर और उसे जलाते है।

नरक निवारन चतुर्दशी पर विशेष पूजा और अनुष्ठान किए जाते हैं। प्रार्थना भगवान शिव को समर्पित है और उन्हें मोक्ष प्राप्त करने और पुनर्जन्म से बचने के लिए चढ़ाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन दी जाने वाली प्रार्थना अत्यधिक प्रभावी होती है और पापों से छुटकारा देने में मदद करेगी। इस प्रकार, यह भक्तों को नरक या नारक से बचाएगा।

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