Mallikarjun Jyotirling Srisailam


Mallikarjun Jyotirling, Srisailam, Andhra Pradesh

Srisailam  is located in the Indian state of Andhra Pradesh. It is important for both Hindu sects of Shaivam and Shaktam because this temple is known as one of the twelve Jyotirlingas of Lord Shiva and one of the eighteen Shaktipeeths of the Goddess Parvati. This temple is located on the mountain called Shaila Mountain which is regarded as Kailash of South India. Shri Shaila Mountain comes on the banks of the Krishna River in the southern part of Andhra Pradesh. Mallikarjuna, the chief god of Mallikarjun Jyotirlinga, is the form of Shiva and Bhramramamba Devi, is the form of Parvati. According to Shiva Purana, Shiva Parvati thought of completing the marriage of both sons, Kartikeya and Ganesh simultaneously, but for some reason, the marriage of Shri Ganesha was done before the marriage of Kartikeya, and Kartikeya became unhappy with this fact. Due to his displeasure, Kartikeya came to the remote mountain range and decided to remain virgin, even the Gods tried to console him and explain but he did not believe. 

Mallikarjun
Malikarjun

Eventually, Shiva-Parvati came to the mountain and asked Kartikeya to come with them, but Kartikeya refused. Seeing this, Shiva Parvati became very sad and decided to stay with the Kartikeya on the mountain. Then Shiva embraced the form of a Jyotirling and lived on the mountain in the name of MallikarjunaMallika means Parvati, and Arjun is the second name of Shiva. People believe that by looking at the tip of this mountain, one becomes free from all sins and is freed from the vicious cycle of life and death.

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एशिया का सबसे ऊँचा शिव मंदिर – जटोली शिव मंदिर [Asia’s tallest Shiva temple – Jatoli Shiva Temple]


Asia’s tallest Shiva temple – Jatoli Shiva Temple

हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में स्थित एशिया का सबसे ऊँचा शिव मंदिर

जटोली शिव मंदिर 

पहाड़ की पर निर्मित बहुत ही भव्य और शानदार शिव मंदिर जो की दक्षिण-द्रविड़ शैली में बनाया गया है। इस मंदिर का निर्माण जनता के सहयोग से 1974 में किया गया था। जटोली शिव-मंदिर सोलन से करीब सात किलोमीटर दूर है और मंदिर में दर्शन करने के लिए भक्तों को 100 सीढ़ियां चढ़ कर पहुँचाना होता है। मंदिर में कला और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को है। जटोली शिव-मंदिर उत्तर भारत बनाया गया है पर इसकी निर्माण शैली बिल्कुल दक्षिण भारत की है। मंदिर की ऊंचाई 111 फिट है और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार यह मंदिर एशिया के सबसे ऊँछे मंदिरों में शामिल है। मंदिर के अंदर स्फटिक से निर्मित शिव लिंग स्थापित किये गए हैं और मंदिर में चारों तरफ विभिन्न देवी देवतों के मूर्तियां हैं।  

शिव मंदिर
एशिया का सबसे ऊँचा शिव मंदिर

बाबा कृष्णानंद परमहंस के दिशा-निर्देश और मार्गदर्शन पर जटोली शिव मंदिर के स्थापना करि गयी थी। बाबा कृष्णानंद परमहंस ने मंदिर वाले स्थान पर तपस्या भी करी थी और मान्यताओं के अनुसार शिवजी ने इस स्थान पर कुछ समय विश्राम किया था। बाबा कृष्णानंद परमहंस ने शिव जी की आराधना करी और उनके त्रिशूल से प्रहार कर पानी निकला जिससे की इलाके में रहने वाले लोगों को पानी की समस्या से निदान मिला। मंदिर के उतर पूर्व कोने में आज भी वह पवित्र जल कुंड है और कुंड के पानी में कई प्रकार में औषधीय गुण पाए जाते हैं। मंदिर के बाहरी प्रांगण में नंदी की विशालकाय मूर्ति भी है। 


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एशिया का सबसे ऊँचा शिव मंदिर – जटोली शिव मंदिर [Asia’s tallest Shiva temple – Jatoli Shiva Temple]

पहाड़ की पर निर्मित बहुत ही भव्य और शानदार शिव मंदिर जो की दक्षिण-द्रविड़ शैली में बनाया गया है। इस मंदिर का निर्माण जनता के सहयोग से 1974 में किया गया था। जटोली…..



शिवलिंग का अर्थ और उससे जुड़ी मान्यताऐं 

जानकारी और ज्ञान के आभाव के कारण शिवलिंग को कुछ लोग पुरुष के शरीर के एक अंग से सम्बंधित कर भ्रमित करते हैं जबकि यह सच नहीं है। भारत की संस्कृति …….


हनुमान


श्री हनुमान चालीसा

-: दोहा :-
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमनु मुकुरु सुधारि
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार



हनुमान जी की आरती

आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

जाके बल से गिरिवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके।।


श्री शनि देव

Jagannathv
शनि चालीसा

॥दोहा॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज ।करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥

Jagannathv
शनि कवचं

अथ श्री शनिकवचम्
अस्य श्री शनैश्चरकवचस्तोत्रमंत्रस्य कश्यप ऋषिः IIअनुष्टुप् छन्दः II शनैश्चरो देवता II शीं शक्तिः II शूं कीलकम् II शनैश्चरप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः IIनिलांबरो नीलवपुः किरीटी गृध्रस्थितस्त्रासकरो धनुष्मान् II

श्री राम

Jagannathv

श्री राम चालीसा

श्री रघुवीर भक्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
निशिदिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहिं होई॥1॥
ध्यान धरे शिवजी मन माहीं। ब्रह्म इन्द्र पार नहिं पाहीं॥
दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहूं पुर जाना॥2॥

Jagannathv

आरती श्री राम जी

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।
नव कंज लोचन, कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन
कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्।
पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचि