पुरुषोत्तम मास | अधिक मास | मलमास | श्लोक

धर्म ग्रंथों के अनुसार तीन वर्ष में एक बार पुरुषोत्तम मास आता है। इसे अधिक मास भी कहते है।

पुरुषोत्तम माह / अधिकमास क्यों और कब होता है

पंचांग के अनुसार सूर्य की बारह संक्रांति के आधार पर ही वर्ष में 12 माह होते हैं। प्रत्येक तीन वर्ष के बाद पुरुषोत्तम माह आता है। वशिष्ठ सिद्धांत के अनुसार भारतीय हिंदू कैलेंडर सूर्य मास और चंद्र मास की गणना के अनुसार चलता है। अधिकमास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है, जो हर 32 माह, 16 दिन और 8 घटी के अंतर से आता है।

इसका प्राकट्य सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच अंतर का संतुलन बनाने के लिए होता है। भारतीय गणना पद्धति के अनुसार प्रत्येक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, वहीं चंद्र वर्ष 354 दिन 9 घंटे का माना जाता है।

दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है, जो हर तीन वर्ष में लगभग 1 मास के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को मीटाने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अस्तित्व में आता है, जिसे अतिरिक्त होने के कारण अधिकमास का नाम दिया गया है।

पितृमोक्ष अमावस्या के बाद 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक पुरुषोत्तम मास रहेगा। इस कारण 17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि पर्व शुरू होगा।

भारतीय कैलेंडर को पंचांग इसलिए कहा जाता है, क्यों कि इसमें मुख्यतया पाँच बातों की जानकारी रहती हैः

  • तिथि – जो दिनांक यानी तारीख का काम करती है
  • वारः – सोमवार, मंगलवार आदि सात वार
  • नक्षत्र – जो बताता है कि चंद्रमा तारों के किस समूह में है
  • योग – जो बताता है कि सूर्य और चंद्रमा के भोगांशों का योग क्या है, और
  • करण – जो तिथि का आधा होता है।

अधिक मास में करणीय कर्म

श्लोक

आवश्यकर्म मासाख्यं मलमास समृताब्दिकम।
तीर्थे भच्छययो: श्राद्धमाधा नांग पितृ क्रियाम।।

भाव

रुद्राभिषेक, शिवपूजन, श्राध्द कर्म, कथा का श्रवण, जप-तप, आवश्यक पूजन कर्म , भगवत का पाठ, प्रल्हाद प्रसन्न पाठ , अन्नप्रासन नित्यपूजा दान आदि कर्म करना चाहिए।

Adhik Maas Mein Karaneey Karm

aavashyakarm maasaakhyan malamaas samrtaabdikam.
teerthe bhachchhayayo: shraaddhamaadha naang pitr kriyaam.

Meaning

Rudrabhishek, Shivpujan, Shraddha Karma, Listening to Katha, Japa-Tapa, Necessary Pujan Karma, recitation of Bhagavata, Pralhad Delightful recitation, Annaprasana Nityapooja Dan etc. should be done.

मलमास मैं क्या नहीं करना चाहिए ?

श्लोक

अग्न्या धेयं प्रतिष्ठा च यज्ञो दानव्रतानि च।
वेदव्रत वृषोत्सर्ग चूड़ाकारण मेखला:।।
गमने देव तीर्थनां विवाहमभिषेचनमः ।
यानं च गृहकर्मणी मलमासे विवर्जयेर्त।।

भाव

नववधू प्रवेश ,नवग्रूव प्रवेश भूमि पूजन यज्ञोपवीत संकर चूड़ाकरण्ड {मुंडन} कर्णवेध स्वर्ण- भूमि को खरीदना उधर लेना और उधर देना विवाह संस्कार करना नए गृह का निरमंड करना नव्वाहन खरीदना नववें वस्त्र अदि धारंड करना कोई नव व्रत {काम्य व्रत } का उठाना गऊ दान उपनयन उपाकर्मादि कामो के संपादन को मलमास में वर्जित बताया गे हैं

Agn’yā dhēyaṁ pratiṣṭhā ca yajñō dānavratāni ca.
Vēdavrata vr̥ṣōtsarga cūṛākāraṇa mēkhalā:..
Gamanē dēva tīrthanāṁ vivāhamabhiṣēcanamaḥ.
Yānaṁ ca gr̥hakarmaṇī malamāsē vivarjayērta..

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