Maa durga ke 9 roop name in Hindi 2019 | Nav Durga


maa durga ke 9 roop name in hindi 2019

( Nav Durga )

जगदाम्बा, भवानी, काली, दुर्गा ये सभी स्त्री रूप में एक ही ईश्वरीय शक्ति को दिए गए अलग-अलग नाम हैं। सभी रूप ( maa durga ke 9 roop name in hindi 2019 )ब्रह्मांड की शक्ति या ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करते हैं। साथ ही प्रकृति के माँ रूप को भी दर्शाते हैं।

महादेव की पत्नी माता पार्वती ने विभिन्न परिस्थितियों में इन रूपों को धारण किया और हर रूप के अनुसार उन्हें एक नाम दिया गया।

हर रूप को भक्त माँ शब्द लगा कर संबोधित करते हैं। माँ जगदाम्बा, माँ भवानी, माँ काली, दुर्गा माँ क्यूंकि वास्तविक दुनिया में एक स्त्री का माँ रूप ही बच्चों को जन्म देता है और उनकी रक्षा करता है। माँ दुर्गा ही संपूर्ण ब्रह्मांड की माता हैं।

शिव को ब्रह्मांड कहा गया है और माँ को उनकी शक्ति। माँ दुर्गा नारी शक्ति का प्रतिक हैं उनकी 8 भुजाएँ है जिनमे हर भुजा में एक अस्त्र है या कोई पवित्र वास्तु है। माँ का वाहन एक शेर है जो की असीमित शक्ति और असीमित इच्छाओं पर माँ के नियंत्रण को दर्शाता है। 

 
maa durga ke 9 roop name in hindi
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नवदुर्गा के नौ रूप ( Maa durga ke 9 roop name in Hindi 2019 )

1. शैलपुत्री – पर्वतों के राजा हिमवान की बेटी भवानी, पार्वती या हेमावती को ‘शैलपुत्री’ भी कहा जाता है क्यूंकि “शैल” का अर्थ है पहाड़, “पुत्री” का अर्थ है बेटी। नवरात्री के पहले दिन दुर्गा के नौ रूपों में सबसे पहले ‘शैलपुत्री’ अवतार को पूजा जाता है। इस रूप में वे एक बैल की सवारी करती हैं और अपने एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल धारण करती हैं।  

maa durga ke 9 roop name in hindi
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2 . ब्रह्माचारिणी – ‘ब्रह्म’ का अर्थ होता है ‘तप’, अर्थार्त नवदुर्गा का दूसरा रूप तपस्या और अच्छे आचरण का पालन दर्शाता है। यह रूप ज्ञान और विवेक को भी दर्शाता है। ज्ञानियों द्वारा धारण किया जाने वाला रुद्राक्ष इसका प्रिय आभूषण है। ब्रह्माचारिणी रूप में माँ के एक हाथ में पानी का बर्तन है और दूसरे में माला।

3. चंद्रघन्टा – इस रूप में दुर्गा माँ के माथे पर चंद्र या आधा चाँद जो की घंटी के आकर में है सुशोभित होता है। यह रूप जीवन में शांति और समृद्धि के प्रतिक मन गया है। माँ  चंद्रघन्टा के अवतार में सुनहरे रंग से सज्जित होती है और उनके दस हाथ हैं जिनमे से आठ हाथों में हथियार हैं और दो हाथ नुकसान को रोकने और वरदान देने की मुद्रा में हैं। चंद्रघन्टा के अवतार 3 आंखे है। 

4 . कुष्मांडा – नवरात्र में देवी का चौथा रूप कुष्मांडा कहलाता है। आठ हाथ एक हथियार एक माला और शेर पर सवारी करता यह रूप अदिव्तीय आभा से सुसज्जित है। कु का अर्थ होता है थोड़ा , ऊष्मा का गर्मी और ब्रह्माण्ड शब्द से मांडा लिया गया है पुरे नाम का अर्थ होता है लौकिक ऊष्मा जो की ब्रह्माण्ड का निर्माण करती है।  

5. स्कन्द माता – स्कंद या भगवान कार्तिकेय की माँ, जिन्हे देवताओं ने राक्षसोंके विरुद्ध युद्ध में अपना सेनापति चुना था। इस रूप में माता अपने पुत्र स्कन्द को साथ लिए है जो की बाल रूप में है। माँ अपने वाहन शेर के साथ हैं और स्कन्द उनकी गोद में विराजमान हैं। माँ की तीन आँखें और चार हाथ हैं; दो हाथ कमल धारण करते हैं, जबकि अन्य दो हाथ क्रमशः रक्षा और अनुदान देते हैं। ऐसा कहा जाता है की स्कंदमाता के शील से मूर्ख भी ज्ञान का सागर बन जाता है।

6 . कात्यायनी – छठा रूप कात्यायनी कहलाता है। काटा नाम के एक ऋषि थे, उन्होंने देवी माँ को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या की और लम्बी तपस्या के बाद देवी माँ ने उन्हें दर्शन दिए। ऋषि ने माँ से देवी के रूप में बेटी की कामना की। उनकी इच्छा को पूरा करने लिये माँ ने उनके घर बेटी के रूप में जन्म लिया और कात्यायनी कहलायी। 

7. कालरात्रि – अज्ञानता और अंधकार का नाश करने वाला रूप। अंधकार जैसा गहरा रंग, अव्यवस्थित बाल, आक्रामक मुद्रा, सांसो से उज्ज्वल और भयानक निकलती  लपटें। 4 हाथ, एक में क्लीवर और एक में मशाल जबकि शेष 2 “देने” और “रक्षा” करने की मुद्रा में, उलटे ऊपर के हाथ में लोहे का बना एक काँटा जैसा हथियार और उसके बाएँ बाएँ हाथ में एक घड़ा। वाहन के रूप में गधा।

8. महागौरी – हिमालय के जंगलों में घोर तपस्या में लीन होने के कारण उनका रंग गहरा हो गया। जब महादेव ने उन्हें गंगा के पवित्र जल से साफ़ किया तो देवी ने अपने सूंदर रूप को वापस पा लिया और अत्यंत श्वेत रंग के कारण महागौरी कहलायी। महागौरी अत्यंत बुद्धिमान और शांत स्वभाव की हैं। महागौरी की चार भुजाएं हैं, ऊपरी हाथ लोहे का बना एक काँटा जैसा हथियार है और बाएँ हाथ में एक घड़ा। वे आठ वर्ष की है और शंख, चंद्रमा, चमेली के समान श्वेत हैं। महागौरी, दुर्गा की सभी शक्तियों के साथ ही शांति और करुणा का भी संचार करती हैं और उन्हें बैल की सवारी करते हुए दर्शाया जाता है।

9. सिद्धिदात्री ( Maa durga ke 9 roop name in Hindi ) – नवरात्री में पूजा जाने वाला नौवां रूप सिद्धिदात्री है । आठ सिद्धियाँ हैं – अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्रपत्ति, प्राकाम्य, इष्टित्व और वशिष्ठ। सिद्धिदात्री नौवीं सीधी है और इसमें अलौकिक शक्तियाँ हैं। इस रूप में माँ की चार भुजाएं हैं, वाहन के रूप में शेर है और वे हमेशा ही प्रसन्न मुद्रा में हैं। माँ सिद्धिदात्री सभी देवी-देवताओं, संतों, योगियों, तंत्र-मंत्रियों और सभी भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। ‘देवीपुराण’ के अनुसार महादेव ने भी इनकी आराधना कर सभी सिद्धियों को प्राप्त किया।

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क्यों करें घर में गणेश विसर्जन?


श्री गणेश के लाखों भक्त है और गणेश चतुर्थी के उपलक्ष्य में भारत वर्ष के लगभग हर घर में गणपति जी की स्थापना की जाती है। हर घर गणेश, घर घर गणेश।

और जैसे की स्थापना की जाती है वैसे ही चतुर्थी की समाप्ति पर सभी भक्त गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन भी करते हैं। गणेश विसर्जन प्रतिक है बदलाव का।

किन्तु विसर्जन की प्रक्रिया में हम सभी को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए की हमने केवल इको-फ्रेंडली प्रतिमा ही स्थापित की हो जो की पर्यावरण को नुकसान न पहुँचाए।

इको-फ्रेंडली प्रतिमा पर्यावरण के लिए तो अच्छी होती ही है साथ ही हमे भी श्री गणेश के आशीर्वाद को सदा के लिए हमारे पास रखने की आज़ादी भी प्रदान करती है।

आईये बताते हैं कैसे – अगर आप इको-फ्रेंडली प्रतिमा नहीं लये हैं तो विसर्जन करने के लिए आपको बाहर ही जाना होगा क्यूंकि प्लास्टर ऑफ पैरिस से बनी प्रतिमा कभी भी पानी में नहीं गलती, किन्तु इको-फ्रेंडली प्रतिमा आप चाहें तो अपने घर में ही विसर्जित कर सकते हैं क्यूंकि यह तुरंत ही पानी में घुल के मिटटी में परिवर्तित हो जाती है।

प्रतिमा से प्राप्त मिट्टी को हम चाहें तो गमले में रख कर उसमे पौधा रोप सकते हैं और श्री गणेश का आशीर्वाद सदा के लिए हमारे घर में रहेगा। 

घर में करें गणेश विसर्जन की विधि 

गणेश विसर्जन

आपके द्वारा स्थापित की गयी गणेश प्रतिमा के आकृति और आकर के अनुसार बर्तन, बाल्टी, टब, ड्रम, टंकी आदि का चुनाव करें 
– उससे किसी साफ़ स्वच्छ स्थान पर रखें 
– सुनिश्चित करें की बर्तन, बाल्टी, टब, ड्रम, टंकी आदि बिलकुल साफ हो 
– इसमें बिल्कुल स्वच्छ जल भरें 
– जल में थोड़े से सुगन्धित फूल डालें, हो सके तो दो बूँद इत्र भी डालें 
– पास ही अगरबत्ती और धुप लगायें 
– पास ही एक पाट रखें और उस पर आसान बिछाएँ 
– श्री गणेश की पूजा कर धूम धाम से उन्हें विसर्जन स्थल तक लाएँ 
– ॐ गम गणपतये नमः का जब करें और पाट पर श्री गणेश को बिठायें 
– पूरी श्रद्धा से गणपति की पूजा करें और परिवार की मंगल कामना करें 
– नैवेध प्रसूतु कर नारियल बड़ा करें 
– श्री गणेश से आग्रह करें की अगले वर्ष वे फिर आपके घर पधारे और आपको सुख समृद्धि प्रदान करें 
– श्री गणेश की आरती करें 
– सभी लोग हाथ लगा कर धीरे से श्री गणेश की प्रतिमा को पानी में छोड़ दें 
– गणपति बपा मोरया का उदघोष करें 

कुछ समय में आपके द्वारा विसर्जित इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा मिट्टी के रूप में परिवर्तित हूँ जाएगी। मिटटी से पानी अलग कर लें और मिट्टी को गमले में डाल कर उसमें पौधा रोप दें। 

गणेश विसर्जन

जय गणेश 
हर घर गणेश, घर घर गणेश।


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हनुमान


श्री हनुमान चालीसा

-: दोहा :-
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमनु मुकुरु सुधारि
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार



हनुमान जी की आरती

आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

जाके बल से गिरिवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके।।


श्री शनि देव

Jagannathv
शनि चालीसा

॥दोहा॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज ।करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥

Jagannathv
शनि कवचं

अथ श्री शनिकवचम्
अस्य श्री शनैश्चरकवचस्तोत्रमंत्रस्य कश्यप ऋषिः IIअनुष्टुप् छन्दः II शनैश्चरो देवता II शीं शक्तिः II शूं कीलकम् II शनैश्चरप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः IIनिलांबरो नीलवपुः किरीटी गृध्रस्थितस्त्रासकरो धनुष्मान् II

श्री राम

Jagannathv

श्री राम चालीसा

श्री रघुवीर भक्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
निशिदिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहिं होई॥1॥
ध्यान धरे शिवजी मन माहीं। ब्रह्म इन्द्र पार नहिं पाहीं॥
दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहूं पुर जाना॥2॥

Jagannathv

आरती श्री राम जी

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।
नव कंज लोचन, कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन
कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्।
पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचि