Kedarnath Temple | केदारनाथ ज्योतिर्लिंग | Kedarnath Jyotirling | Ganesh

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग | Kedarnath Jyotirling

Kedarnath Temple


केदारनाथ ज्योतिर्लिंग | Kedarnath Jyotirling

Kedarnath Temple

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग
Kedarnath Temple

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग
उत्तराखंड,
भारत
केदारनाथ ज्योतिर्लिंग भारत के उत्तराखंड राज्य में मंदाकिनी नदी के किनारे स्थित है। केदारनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे ऊंचा है, यह मंदिर 3,583 मीटर (समुद्र तल से 11,755 फीट) की ऊंचाई पर बनाया गया है। केदारनाथ मंदिर का वर्णन स्कंद पुराण में मिलता है जो की 7 वीं -8 वीं शताब्दी का ग्रन्थ है।

पुरानी मान्यताओं के अनुसार मंदिर का निर्माण पांडवों द्वारा करवाया गया था। महाभारत के युद्ध के बाद वे अपने पापों के प्रायश्चित के लिए शिव जी की पूजा अर्चना कर क्षमा मांगना चाहते थे और इसी दौरान केदारनाथ मंदिर का निर्माण करवाया।

पांडवों ने केदारनाथ में तपस्या करके शिव को प्रसन्न किया था। लिंगम के रूप में केदारनाथ की पीठासीन प्रतिमा अनियमित आकार की है, जिसकी परिधि में 3.6 मीटर (12 फीट) और ऊंचाई में 3.6 मीटर (12 फीट) है।

मंदिर के सामने एक छोटा कमरा है जिसमे की कई सारे स्तम्भ हैं जिसमे पार्वती जी, पॉँचों पांडवों, श्री कृष्ण, शिव जी के वाहन नंदी, और शिव जी के रक्षक वीरभद्र की प्रतिमा हैं।

द्रौपदी और अन्य देवताओं की प्रतिमा भी मुख्य हॉल में स्थापित की गई है। केदारनाथ मंदिर काफी ऊंचाई पर स्थित है और हिमालय पर होने के कारण यहाँ का मौसम काफी ठंडा रहता है।

मुश्किल मौसम की स्थिति के कारण मंदिर केवल अप्रैल (अक्षय तृतीया) और नवंबर (कार्तिक पूर्णिमा – शरद पूर्णिमा) के महीनों के बीच आम जनता के लिए खुला रहता है।

सर्दियों के दौरान, केदारनाथ मंदिर से विग्रहों (देवताओं) को ऊखीमठ ले जाया जाता है और जहां अगले छह महीनों के लिए देवता की पूजा की जाती है।

Kedarnath Jyotirling
Kedarnath Temple

Kedarnath Jyotirling
Uttarakhand,
India
Kedarnath Jyotirlinga is located on the banks of the Mandakini river in Uttarakhand state of India. Kedarnath Jyotirlinga temple is the highest of 12 Jyotirlingas, this temple is built at a height of 3,583 meters (11,755 feet above sea level).

The Kedarnath temple is described in Skanda Purana, which is the text of the 7th-8th century. According to old beliefs, the temple was constructed by the Pandavas.

After the war of Mahabharata, they wanted to apologize by worshiping Shiva for the atoning of their sins. Pandavas pleased Shiva by doing penance in Kedarnath.

In the form of Lingam, the presiding image of Kedarnath is of irregular shape, of which 3.6 meters (12 feet) in height and 3.6 meters (12 feet) in height.

There is a small room in the front of the temple, which has several columns, including the Parvati ji, the five Pandavas, Shri Krishna, Nandi vehicle of Shiva, and the statue of Virbhadra the protector of Shiva.

The statue of Draupadi and other deities has also been established in the main hall. Kedarnath Temple is situated at a very high altitude and due to its presence on the Himalayas, the weather here is quite cold. Due to the difficult weather conditions, the temple remains open only for the general public between April (Akshay Tritiya) and November (Kartik Purnima – Sharad Purnima).

During the winter, the Deities (Gods) are taken from the Kedarnath temple to the uprising and where the deity is worshiped for the next six months.

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