9 Interesting facts about Shri Ganesha

Interesting facts about Shri Ganesha


Interesting facts about Shri Ganesha

Interesting facts about Shri Ganesha

– Shri Ganesh enjoys the position of first worshiped God in Hindu religion. Before starting any auspicious work, Ganesh is worshiped first before any other god is worshiped 

– Ganapati was born at 12 o’clock aftrnoon of the Bhadrapad Shukla Chaturthi 

– Mother Parvati kept the fast called ‘Punyak’ for son’s birth. Because of this fast, Mata Parvati received Shri Ganesh as her son. 

– According to Shiva Mahapurana, the idea of Mata Parvati to create a Shrignesh was given to her friends Jaya and Vijaya. Just like Nandi follows the command of Shiva, there should be someone who is dedicated to Parvati only. Impressed with this thought, Mother Parvati composed Shri Ganesh from the scum of her body. 

– According to Shiva Mahapurana, the durva which is to be ascended to Ganpati, should be long as finger with three lumps and should be rootless. 

– According to Shiva Purana, the color of the body of Shri Ganesha is red and green. Red color represents power and green is considered symbol of prosperity. Therefore, where there is Ganesha, there is the power and prosperity. 

– Shri Ganesh wrote the Mahabharata. Vedvyas dictated and Ganeshji wrote it. 

– According to Shivamahapurana, there were two wives of Ganpati, Riddhi and Siddhi and their sons are Shubh & Labh. 

– According to Shivamahapuran, when Lord Shiva was going to destroy Tripura, then the Aakashwani took place that by the time you did not worship Shree Ganesha, you would not be able to kill Tripura. Then Lord Shiva called Bhadrakali and worshiped Gajanan and won victory in the war. 

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बड़ा गणपति इंदौर – जैसा की नाम से प्रतीत होता है बड़ा गणपति मंदिर में श्री गणेश की विशाल मूर्ति है। मूर्ति की बड़े आकर के कारण भक्तों ने इसका नाम…..


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मिट्टी के गणेश जी कैसे बनाते हैं

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दक्षिण भारत में गंगा लाये गणपति 

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शिव पार्वती के विवाह में सम्मिलित होने और विवाह के बाद शिव पार्वती के दर्शन करने के लिए लोग बड़ी संख्या में कैलाश पर्वत की ओर जाने लगे। इतने सरे लोगो में कैलास पर्वत की ओर जाने….


घूमतेगणेश की जानकारी

आमंत्रण
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घूमते गणेश आयोजन में मंगलमूर्ति श्रीगणेश को आमंत्रित करने के लिए यजमान को शहर के बंधू बांधवो को आमंत्रित करना होगा ताकि अधिक से अधिक लोग आशीर्वाद ले सके साथ ही गणराज भी भक्तो की भीड़ से आनंदित हो उठे , तीन दिनों के इस आयोजन में विघ्हर्ता के सिंहासन को सजा कर , भक्तो और गणपति.......


कहाँ कहाँ जायेंगे
कहाँ कहाँ जायेंगे

घूमते गणेश आयोजन के तहत मंगलमूर्ति गणराज अपने भक्तों के आमंत्रण पर उनके आयोजनों में सम्मिलित होंगे, जैसे शादी, फैक्ट्री का शुभ आरंभ, नये व्यव्साय का आरम्भ या कोई और शुभ अवसर और अपने आशीर्वाद से उस आयोजन को अभूतपूर्व बनाएंगे और सफलता का आशीर्वाद प्रदान करेंगे।.........


श्री गणेश


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गणेश चतुर्थी पर श्री गणेश की मूर्ति क्षतिग्रस्त हो जाए तो क्या करें?

श्री गणेश सभी के चहेते भगवान हैं और वे भी अपने भक्तों को बहुत प्यार करते हैं। किन्तु कई बार भक्त ऐसी दुविधा में फसं जाता है की समझ नहीं आता


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एशिया का सबसे ऊँचा शिव मंदिर – जटोली शिव मंदिर 

पहाड़ की पर निर्मित बहुत ही भव्य और शानदार शिव मंदिर जो की दक्षिण-द्रविड़ शैली में बनाया गया है। इस मंदिर का निर्माण जनता के सहयोग से 1974 में किया गया था। जटोली…..



शिवलिंग का अर्थ और उससे जुड़ी मान्यताऐं 

जानकारी और ज्ञान के आभाव के कारण शिवलिंग को कुछ लोग पुरुष के शरीर के एक अंग से सम्बंधित कर भ्रमित करते हैं जबकि यह सच नहीं है। भारत की संस्कृति …….


हनुमान


श्री हनुमान चालीसा

-: दोहा :-
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमनु मुकुरु सुधारि
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार



हनुमान जी की आरती

आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

जाके बल से गिरिवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके।।


श्री शनि देव

Jagannathv
शनि चालीसा

॥दोहा॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज ।करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥

Jagannathv
शनि कवचं

अथ श्री शनिकवचम्
अस्य श्री शनैश्चरकवचस्तोत्रमंत्रस्य कश्यप ऋषिः IIअनुष्टुप् छन्दः II शनैश्चरो देवता II शीं शक्तिः II शूं कीलकम् II शनैश्चरप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः IIनिलांबरो नीलवपुः किरीटी गृध्रस्थितस्त्रासकरो धनुष्मान् II

श्री राम

Jagannathv

श्री राम चालीसा

श्री रघुवीर भक्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
निशिदिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहिं होई॥1॥
ध्यान धरे शिवजी मन माहीं। ब्रह्म इन्द्र पार नहिं पाहीं॥
दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहूं पुर जाना॥2॥

Jagannathv

आरती श्री राम जी

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।
नव कंज लोचन, कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन
कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्।
पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचि