Ganpati decoration : घर में इको-फ्रेंडली तरीके से गणेश सजावट कैसे करें

Eco-friendly


गणेश चतुर्थी में घर में उपलब्ध वस्तुओं से सजावट 

बेकार की चीजों में से उत्तम सजावट 

पानी की बॉटल – प्लास्टिक या कांच की पानी की बोतलें जो की हम उपयोग के बाद फेंक देते हैं उनको कलात्मक रूप से सजावट के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। गणपति के मुर्ति के पीछे और आसपास जमाई जा सकती हैं आप चाहें तो इनमे सीरीज लाइट लगा के या रंगीन पानी भर के और सूंदर बना सकते हैं। 

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ईको फ्रेंडली गणेश सजावट की सरल विधि 

नारियल के साथ सजावट – नारियलों को एक साथ लटका के सजावट के लिए उपयोग में लाया जा सकता है सबसे अछि बात ये है की नारियल पर्यावरण को बिलकुल भी नुकसान नहीं पहुंचाता। 

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पौधे के साथ सजावट – पर्यावरण अनुकूल एक और सुझाव विभिन्न प्रकार के पौधों के साथ गणपति के स्थापना स्थान को सजाया जा सकता है। गणपति के आगमन के 10 -15 दिन पहले आप चाहें तो गेहूँ के दाने गमले दे डाल दें और गणपति के आगमन के समय इनमें जो नन्हें से पौधे होंगे उन्हें आप सजावट के लिए उपयोग में लाएँ। 

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फूलों के साथ सजावट – सूंदर, रंग बिरंगे, सुगन्धित फूल आपकी सजावट और पुरे वातावरण को देखने लायक बना देंगे। 

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किताबों और समाचार पत्रों के साथ सजावट – पुराने समाचार पत्रों को रचनात्मक रूप से सजावट के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। आप चाहें को किताबों का उपयोग भी सजावट के लिए कर सकते हैं। 

रंग बिरंगे कपड़ो और दुपट्टों से सजावट – गणपति के मुर्ति के पीछे और आसपास रंग बिरंगे कपड़ो और दुपट्टों से सजावट की जा सकती है। आप चाहें तो की एक रंग का उपयोग कर के भी सजावट कर सकते हैं या बहुत सारे रंगों को मिला कर भी। चाहें तो पूरी सजावट सिर्फ सफ़ेद कपड़ो से करें और फिर उस पर विभिन्न रंगों की लाइटों का उपयोग कर सजावट को और भी सुन्दर बना सकते हैं। 

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मोटा कागज़, कार्ड बोर्ड और माउंट बोर्ड से गणपति सजावट – रंग बिरंगे मोटे कागज़, कार्ड बोर्ड या माउंट बोर्ड का उपयोग कर आप जो भी बनाना चाहें बना सकते हैं। जैसे की मंदिर का डिज़ाइन, बड़े फूल, झरोखे, पेड़, तितलियाँ आदि और लाइटों का उपयोग कर गणपति के स्थान की सजावट को और भी सुन्दर बना सकते हैं। 

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फलों और सुखे मेवे के साथ सजावट – फल कई तरह के रंगो और आकारों में आते है उसी तरह सुखे मेवे भी कई तरह के रंगो और आकारों में आते है आप चाहें को इन दोनों को अलग अलग या चाहें तो साथ मिला कर सजावट के लिए उपयोग में ला सकते हैं। 

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श्री रघुवीर भक्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
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ध्यान धरे शिवजी मन माहीं। ब्रह्म इन्द्र पार नहिं पाहीं॥
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नव कंज लोचन, कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन
कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्।
पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचि