दक्षिण भारत में गंगा लाये गणपति 

दक्षिण भारत में गंगा लाये गणपति 

शिव पार्वती के विवाह में सम्मिलित होने और विवाह के बाद शिव पार्वती के दर्शन करने के लिए लोग बड़ी संख्या में कैलाश पर्वत की ओर जाने लगे। इतने सरे लोगो में कैलास पर्वत की ओर जाने के कारण दुनिया उत्तर की ओर झुकने लगी और धरती का संतुलन बिगड़ने लगा। असंतुलन को देखते हुऐ शिव जी ने ऋषि अगस्त्य से अनुरोध किया कि वे दक्षिण की ओर जाकर संतुलन बनाये। दक्षिण भारत पहले बहुत शुष्क हुवा करता था और वहां पानी की बड़ी समस्या थी। जब अगस्त्य ऋषि दक्षिण की ओर प्रस्थान करने वाले थे तो शिव जी ने उन्हें गंगा का कुछ पवित्र जल दिया।  गंगा के जल को अगस्त्य ऋषि ने सावधानी से बर्तन में संरक्षित कर लिया।  

दक्षिण भारत में गंगा लाये गणपति
दक्षिण भारत में गंगा लाये गणपति 

दक्षिण पहुँचने के बाद एक दिन जब अगस्त्य ऋषि सो रहे थे तो श्री गणेश ने एक कौवे का रूप धारण किया और अगस्त्य के बर्तन जिसमे गंगा का पानी था उसको को काट दिया। बर्तन से निकलते ही पानी ने एक नदी का रूप धारण कर लिया और पुरे दक्षिण भारत में कावेरी नदी कहलायी। इस नदी को “कावेरी”- वह जो एक कौवे द्वारा फैलाई गई थी कहा जाता है। श्री गणेश की कृपा से कावेरी नदी पुरे दक्षिण भारत के लिए जीवन देयानि है और पूजी जाती हैं।