Ganesh chaturthi 2020


Ganesh chaturthi 2020

गणेश चतुर्थी 2020 में शनिवार 22 अगस्त  को होना मानी जा रही है और अनंत चतुर्दशी १ सितम्बर 2020 को आएगी। 

गणेश चतुर्थी भारतवर्ष में बड़ी ही धूम धाम और श्रद्धा से मनाया जाने वाला पर्व है। आज के परिवेश में ना सिर्फ हिन्दू धर्म को मानने वाले बल्कि कई दुसरे धर्मो को मानने वाले भी श्री गणेश में आस्था रखते हैं और बड़ी ही आस्था के साथ गणेश चतुर्थी पर श्री गणेश की स्थापना अपने घर या व्यावसायिक स्थलों पर करते हैं। सलमान खान और उनका परिवार इस श्रृंखला में आने वाला सबसे प्रमुख मुस्लमान परिवार है जो की कई सालों से श्री गणेश की स्थापना अपने घर में करता आ रहा है।

Ganesh chaturthi 2020
Ganesh chaturthi 2020

पुराणों के अनुसार गणेश चतुर्थी की शुरुआत श्री गणेश के जन्म दिन को उत्सव के रूप में मनाने से हुई है। अर्थार्त गणेश चतुर्थी श्री गणेश का जन्म उत्सव है। इसके लिए जगह-जगह गणेश चतुर्थीके अवसर पर श्री गणेश की बड़ी प्रतिमायें स्थापित की जाती हैं और उनकी पुजा अर्चना की जाती है। गणेश चतुर्थी भारत में ९ दिन के उत्सव के रूप में मनाया जाता है। जैसा की सभी को ज्ञात है की गणेश को प्रथम पुज्य का स्थान प्राप्त है, इसलिए भारत वर्ष में सभी त्यहारों की शुरुआत गणेश चतुर्थी के बाद से होती है।

गणेश चतुर्थी को इतना विशाल सामाजिक और सार्वजनिक कार्यक्रम बनाने का श्रेय सबसे पहले छत्रपति शिवाजी महाराज को जाता है। उन्होंने मुगल-मराठा युद्धों के बाद  गणेश चतुर्थी के पर्व को लोगों को साथ ला एकजुट करने के लिए करा। इसी से प्रेरणा ले कर 19 वीं शताब्दी में भारतीय स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य तिलक ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ भारतवासियों को एकजुट करने के लिए गणेश चतुर्थी पर्व को एक महत्वपुर्ण मंच के रूप में स्थापित किया।

घुमतेगणेश.कॉम में गणेश मन्त्र , शिवा मंत्र , हनुमान मंत्र सभी तरह के मन्त्र है, और भी गणेश भजन्स , शिव भजन्स , गणेश चालीसा , शिव चालीसा, हनुमान चालीसा , हर तरह के चालीसा हमारे वेबसाइट पर है, गणेश जी की हर तरह की जानकारी है |

 

Ganesh chaturthi 2020

Ganesh chaturthi 2020 date in india calendar is expected to start on 22nd August which will be a saturday as per this schedule Anant Chaturdashi or ganesh visarjan will be on september 1.

Ganesh chaturthi 2020 is a festival celebrated with great enthusiasm and reverence in India. In today’s environment, people from other religions, we can say non-hindu’s celebrate Ganesh Chaturthi with great faith in Shri Ganesha. Ganesha is a son of Mata Parvati and God Shiva. Lord Ganesha is a most favourite God of everyone especially children. As ganesha is the God of wisdom and prosperity so people in Hindu religion worship him to get the same.

During this Ganesh chaturthi 2020 festival Ganesh idol is establishes at his home or commercial places by the devotee and worshiped. Indian bollywood actor Salman Khan and his family are the most prominent Muslim family in the series, who have been bringing Ganesh idol in his house during Ganesh Chaturthi since many years now.

According to the Puranas, Ganesh Chaturthi is the birth festival of Ganesha.So on the occasion of Ganesh Chaturthi, large statues of Shri Ganesha are established, worshiped and celebrated. Ganesh Chaturthi is celebrated in India as a 9-day festival.

Everyone is aware that Ganesha worshiped before all the god’s so Ganesh Chaturthi marks the starting of all Hindu festivals in India.

The first credit for making Ganesh Chaturthi such a huge social and public program goes to great king Chhatrapati Shivaji Maharaj.

After the Mughal-Maratha wars, Chhatrapati Shivaji Maharaj who established the maratha empire used to celebrate the festival of Ganesh Chaturthi to unite people together. With this inspiration, in the 19th century, Indian freedom fighter Lokmanya Tilak established Ganesh Chaturthi as an important platform for uniting the Indians against the British Government.

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    Ganesha Sketch Here is very beautiful  sketch of Ganesh. These Ganesha sketch are  designed by the sketch Artist Sumeet kale during the period of ganesh chaturthi 2019. 



    पवित्र और चमत्कारिक मेहंदीपुर बालाजीमहराज की सम्पूर्ण कथा!!!!!


    राजस्थान के सवाई माधोपुर और जयपुर की  सीमा रेखा पर स्थित मेंहदीपुर कस्बे में बालाजी का एक अतिप्रसिद्ध तथा प्रख्यात मन्दिर है जिसे “श्री मेंहदीपुर बालाजी मन्दिर” के नाम से जाना जाता है।

     भूत प्रेतादि ऊपरी बाधाओं के निवारणार्थ यहांँ आने वालों का ताँंता लगा रहता है। तंत्र मंत्रादि ऊपरी शक्तियों से ग्रसित व्यक्ति भी यहांँ पर बिना दवा और तंत्र मंत्र के स्वस्थ होकर लौटते हैं । सम्पूर्ण भारत से आने वाले  लगभग एक हजार रोगी और उनके  स्वजन यहाँं नित्य ही डेरा डाले रहते हैं ।

    बालाजी का मन्दिर मेंहदीपुर नामक स्थान पर दो पहाड़ियों के बीच स्थित है, इसलिए इन्हें “घाटे वाले बाबा जी” भी कहा जाता है । इस मन्दिर में स्थित बजरंग बली की बालरूप मूर्ति किसी कलाकार ने नहीं बनाई, बल्कि यह स्वयंभू है । यह मूर्ति पहाड़ के अखण्ड भाग के रूप में मन्दिर की पिछली दीवार का कार्य भी करती है । 

    इस मूर्ति को प्रधान मानते हुए बाकी मन्दिर का निर्माण कराया गया है । इस मूर्ति के सीने के बाईं तरफ़ एक अत्यन्त सूक्ष्म छिद्र है जिससे पवित्र जल की धारा निरंतर बह रही है।

     यह जल बालाजी के चरणों तले स्थित एक कुण्ड में एकत्रित होता रहता है जिसे भक्तजन चरणामृत के रूप में अपने साथ ले जाते हैं । यह मूर्ति लगभग 1000 वर्ष प्राचीन है किन्तु   मन्दिर का निर्माण इसी सदी में कराया गया है । मुस्लिम शासनकाल में कुछ बादशाहों ने इस मूर्ति को नष्ट करने की कुचेष्टा की, लेकिन वे असफ़ल रहे । 

    वे इसे जितना खुदवाते गए मूर्ति की जड़ उतनी ही गहरी होती चली गई । थक हार कर उन्हें अपना यह कुप्रयास छोड़ना पड़ा । ब्रिटिश शासन के दौरान सन 1910  में बालाजी ने अपना सैकड़ों वर्ष  पुराना चोला स्वतः  ही त्याग दिया । भक्तजन इस चोले को लेकर समीपवर्ती मंडावर रेलवे स्टेशन पहुंँचे, जहांँ से उन्हें चोले को गंगा में प्रवाहित करने जाना था ।

    ब्रिटिश स्टेशन मास्टर ने चोले को निःशुल्क ले जाने से रोका और उसका वजन करने लगा, लेकिन चमत्कारी चोला कभी मन भर ज्यादा हो जाता और कभी दो मन कम हो जाता । असमंजस में पड़े स्टेशन मास्टर को अंततः चोले को बिना लगेज ही जाने देना पड़ा और उसने भी बालाजी के चमत्कार को नमस्कार किया ।

    इसके बाद बालाजी को नया चोला चढाया गया । यज्ञ हवन और ब्राह्मण भोज एवं धर्म ग्रन्थों का पाठ किया गया । एक बार फ़िर से नए चोले से एक नई ज्योति दीप्यमान हुई । यह ज्योति सारे विश्व का अंधकार दूर करने में सक्षम है । बालाजी महाराज के अलावा यहांँ श्री प्रेतराज सरकार और श्री कोतवाल कप्तान ( भैरव ) की मूर्तियांँ भी हैं । 

    प्रेतराज सरकार जहां द्ण्डाधिकारी के पद पर आसीन हैं वहीं भैरव जी कोतवाल के पद पर । यहां आने पर ही सामान्यजन को ज्ञात होता है कि भूत प्रेतादि किस प्रकार मनुष्य  को कष्ट पहुंँचाते हैं और किस तरह सहज ही उन्हें कष्ट बाधाओं से मुक्ति मिल जाती है । दुखी कष्टग्रस्त व्यक्ति को मंदिर पहुँचकर तीनों देवगणों को प्रसाद चढाना पड़ता है । 

    बालाजी को लड्डू प्रेतराज सरकार को चावल और कोतवाल कप्तान (भैरव) को उड़द का प्रसाद चढाया जाता है । इस प्रसाद में से दो लड्डू रोगी को खिलाए जाते हैं और शेष प्रसाद पशु पक्षियों को डाल दिया जाता है । ऐसा कहा जाता है कि पशु पक्षियों के रूप में देवताओं के दूत ही प्रसाद ग्रहण कर रहे होते हैं । प्रसाद हमेशा थाली या दोने में रखकर दिया जाता है।

    लड्डू खाते ही रोगी व्यक्ति झूमने लगता है और भूत प्रेतादि स्वयं ही उसके शरीर में आकर बड़बड़ाने लगते है । स्वतः ही वह हथकडी और बेड़ियों में जकड़ जाता है । कभी वह अपना सिर धुनता है कभी जमीन पर लोट पोट कर हाहाकार करता है । कभी बालाजी के इशारे पर पेड़  पर उल्टा लटक जाता है । कभी आग जलाकर उसमें कूद जाता है ।

     कभी फाँसी या सूली पर लटक जाता है । मार से तंग आकर भूत प्रेतादि स्वतः ही बालाजी के चरणों में  आत्मसमर्पण कर देते हैं अन्यथा समाप्त कर दिये जाते हैं । बालाजी उन्हें अपना दूत बना लेते हैं। संकट टल जाने पर बालाजी की ओर से एक दूत मिलता है जोकि रोग मुक्त व्यक्ति को भावी घटनाओं के प्रति सचेत करता रहता है।

     बालाजी महाराज के मन्दिर में प्रातः और सायं लगभग चार चार घंटे पूजा होती है । पूजा में भजन आरतियों और चालीसों का गायन होता है। इस समय भक्तगण जहांँ पंक्तिबद्ध हो देवताओं को प्रसाद अर्पित करते हैं वहीं भूत प्रेत से ग्रस्त रोगी चीखते चिल्लाते उलट पलट होते अपना दण्ड भुगतते हैं ।

     बालाजी मंदिर में प्रेतराज सरकार दण्डाधिकारी पद पर आसीन हैं। प्रेतराज सरकार के विग्रह पर भी चोला चढ़ाया जाता है। प्रेतराज सरकार को दुष्ट आत्माओं को दण्ड देने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है ।  

    भक्ति-भाव से उनकी आरती, चालीसा, कीर्तन, भजन आदि किए जाते हैं । बालाजी के सहायक देवता के रूप में ही प्रेतराज सरकार की आराधना की जाती है। 

    पृथक रूप से उनकी आराधना – उपासना कहीं नहीं की जाती, न ही उनका कहीं कोई मंदिर है। वेद, पुराण, धर्म ग्रन्थ आदि में कहीं भी प्रेतराज सरकार का उल्लेख नहीं मिलता। प्रेतराज श्रद्धा और भावना के देवता हैं। 

    कुछ लोग बालाजी का नाम सुनते ही चाैंक पड़ते हैं। उनका मानना है कि भूत-प्रेतादि बाधाओं से ग्रस्त व्यक्ति को ही वहाँ जाना चाहिए। ऐसा सही नहीं है। कोई भी – जो बालाजी के प्रति भक्ति-भाव रखने वाला है, इन तीनों देवों की आराधना कर सकता है। अनेक भक्त तो देश-विदेश से बालाजी के दरबार में मात्र प्रसाद चढ़ाने नियमित रूप से आते हैं।

    किसी ने सच ही कहा है—”नास्तिक भी आस्तिक बन जाते हैं, मेंहदीपुर दरबार में ।”

    प्रेतराज सरकार को पके चावल का भोग लगाया जाता है, किन्तु भक्तजन प्रायः तीनों देवताओं को बूंदी के लड्डुओं का ही भोग लगाते हैं और प्रेम-श्रद्धा से चढ़ा हुआ प्रसाद बाबा सहर्ष स्वीकार भी करते हैं।

    कोतवाल कप्तान श्री भैरव देव भगवान शिव के अवतार हैं और उनकी ही तरह भक्तों की थोड़ी सी पूजा-अर्चना से ही प्रसन्न भी हो जाते हैं । भैरव महाराज चतुर्भुजी हैं। उनके हाथों में त्रिशूल, डमरू, खप्पर तथा प्रजापति ब्रह्मा का पाँचवाँ कटा शीश रहता है । वे कमर में बाघाम्बर नहीं, लाल वस्त्र धारण करते हैं। वे भस्म लपेटते हैं । उनकी मूर्तियों पर चमेली के सुगंध युक्त तिल के तेल में सिन्दूर घोलकर चोला चढ़ाया जाता है । 

    शास्त्र और लोककथाओं में भैरव देव के अनेक रूपों का वर्णन है, जिनमें एक दर्जन रूप प्रामाणिक हैं।  श्री बाल भैरव और श्री बटुक भैरव, भैरव देव के बाल रूप हैं। भक्तजन प्रायः भैरव देव के इन्हीं रूपों की आराधना करते हैं । भैरव देव बालाजी महाराज की सेना के कोतवाल हैं। 

    इन्हें कोतवाल कप्तान भी कहा जाता है। बालाजी मन्दिर में आपके भजन, कीर्तन, आरती और चालीसा श्रद्धा से गाए जाते हैं । प्रसाद के रूप में आपको उड़द की दाल के बड़े और खीर का भोग लगाया जाता है। किन्तु भक्तजन बूंदी के लड्डू भी चढ़ा दिया करते हैं ।

    सामान्य साधक भी बालाजी की सेवा-उपासना कर भूत-प्रेतादि उतारने में समर्थ हो जाते हैं। इस कार्य में बालाजी उसकी सहायता करते हैं। वे अपने उपासक को एक दूत देते हैं, जो नित्य प्रति उसके साथ रहता है।

    कलियुग में बालाजी ही एकमात्र ऐसे देवता हैं , जो अपने भक्त को सहज ही अष्टसिद्धि, नवनिधि तदुपरान्त मोक्ष प्रदान कर सकते हैं।


    पवित्र और चमत्कारिक मेहंदीपुर बालाजीमहराज की सम्पूर्ण कथा!!!!!

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    देश के ऐतिहासिक मंदिरों में शामिल काशी के संकट मोचन मंदिर का इतिहास करीब 400 साल पुराना है। इसी मंदिर में हनुमान ने राम भक्त गोस्वामी तुलसीदास को दर्शन दिए थे, जिसके बाद बजरंगबली मिट्टी का स्वरूप धारण कर यहीं स्थापित हो गए। बताया जाता है कि संवत 1631 और 1680 के बीच इस मंदिर […]


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    Diwali 2019: [1st Day] Meaning of Dhanteras in Hindi [धनतेरस २०१९] – धनतेरस का अर्थ और कुछ कहानियाँ

    धनतेरस शब्द का अर्थ होता है धन और तेरस को मिला के बनाया गया है।


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    कार्तिक माह की त्रयोदशी के दिन धनतेरस [ Dhanteras ] मनाया जाता है। दिवाली भारत का प्रमुख त्योहार है ये त्योहार पंचदिवसीय


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    शिवलिंग का अर्थ और उससे जुड़ी मान्यताऐं 

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    हनुमान


    श्री हनुमान चालीसा

    -: दोहा :-
    श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमनु मुकुरु सुधारि
    बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि
    बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार
    बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार



    हनुमान जी की आरती

    आरती कीजै हनुमान लला की।
    दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

    जाके बल से गिरिवर कांपे।
    रोग दोष जाके निकट न झांके।।


    श्री शनि देव

    Jagannathv
    शनि चालीसा

    ॥दोहा॥
    जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज ।करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥

    Jagannathv
    शनि कवचं

    अथ श्री शनिकवचम्
    अस्य श्री शनैश्चरकवचस्तोत्रमंत्रस्य कश्यप ऋषिः IIअनुष्टुप् छन्दः II शनैश्चरो देवता II शीं शक्तिः II शूं कीलकम् II शनैश्चरप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः IIनिलांबरो नीलवपुः किरीटी गृध्रस्थितस्त्रासकरो धनुष्मान् II

    श्री राम

    Jagannathv

    श्री राम चालीसा

    श्री रघुवीर भक्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
    निशिदिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहिं होई॥1॥
    ध्यान धरे शिवजी मन माहीं। ब्रह्म इन्द्र पार नहिं पाहीं॥
    दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहूं पुर जाना॥2॥

    Jagannathv

    आरती श्री राम जी

    श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।
    नव कंज लोचन, कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम्॥
    श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन
    कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्।
    पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचि