[Diwali 2020]: Diwali ki sajawat kaise kare


Diwali ki sajawat kaise kare

दिवाली में घर में लक्ष्मी आने के लिए घर की सफाई करनी पड़ती है, जो की एक बहुत ही मेहनत भरा काम है और उसके साथ ही दिवाली की सजावट एक अलग काम रहता है तो हम कई बार सोचते है की घर पर दिवाली की सजावट कैसे करें.

दीपावली की तैयारी के साथ ही घरों, दुकानों आदि की सफाई और सजावट का भी चलन है। बाजार सजावट सामग्री से भर गए हैं और प्रत्येक वर्ष कुछ नया विचार आता है, जो फैशनेबल हो जाता है।

पारंपरिक तरीके के साथ-साथ घरों को सजाने के आधुनिक तरीके भी हैं। सबसे आम तरीकों में से कुछ यहाँ उल्लिखित हैं –

1. प्यारे पौधों के साथ ताजे फूल, माला और मिट्टी के बर्तन

diwali ki sajawat kaise kare

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ताजे सुगंधित फूल, फूलों के गुलदस्ते और पौधों का उपयोग से घर के प्रवेश द्वार के साथ-साथ प्रत्येक कमरे को सजाने के लिए किया जाता है।

2. रंगोली

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दिवाली की सजावट कैसे करें

रंगोलि या सुंदर रंगीन डिजाइनों को प्रार्थना के लिए हल्दी पाउडर या सिंदूर द्वारा तैयार किया जाता है। सुंदर रंगोली बनाने के लिए फर्श, रंगीन रेत ( रंगोलि ), फूल, या चावल के पाउडर का उपयोग किया जाता है।

3. रंगीन बिजली के लैंप ( आकाश कंदील )

diwali ki sajawat kaise kare
दिवाली की सजावट कैसे करें

बहुत से लोग अपने घर के प्रवेश द्वार को रंग-बिरंगे बिजली के लैंप ( आकाश कंदील ) लगते हैं और वे चमकीले और शानदार दिखते हैं।

4. मिट्टी के दीये और बर्तन

diwali ki sajawat kaise kare
दिवाली की सजावट कैसे करें

मिट्टी के दीपक या दीये शुभ माने जाते हैं। इसलिए, हर कोई उन्हें दीवाली के दिन अपने घर पर जगह जगह जलाकर घर को रोशन करते है । बाजार में बहुत सारे आकार, और डिजाइन उपलब्ध हैं। घरों में सुखद खुशबू के लिए मिट्टी के दीपक में किसी प्रकार का सुगंधित तेल भी डाला जाता है।

5. मोम की मोमबत्तियाँ, सुगंधित मोमबत्तियाँ और तैरती मोमबत्तियाँ

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दिवाली की सजावट कैसे करें

बाजारों में मोमबत्तियों, सुगंधित मोमबत्तियाँ और तैरती मोमबत्तियाँ की एक प्रभावशाली विविधता है, जिसका उपयोग उपहार देने के प्रयोजनों के लिए भी किया जाता है। सुगंधित मोमबत्तियाँ महंगी हैं और इसका उपयोग कमरे की सजावट के लिए किया जाता है, क्योंकि इसके इत्र की सजावट असाधारण सजावट के प्रयोजनों के लिए की जाती है।

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क्यों करें घर में गणेश विसर्जन?


श्री गणेश के लाखों भक्त है और गणेश चतुर्थी के उपलक्ष्य में भारत वर्ष के लगभग हर घर में गणपति जी की स्थापना की जाती है। हर घर गणेश, घर घर गणेश।

और जैसे की स्थापना की जाती है वैसे ही चतुर्थी की समाप्ति पर सभी भक्त गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन भी करते हैं। गणेश विसर्जन प्रतिक है बदलाव का।

किन्तु विसर्जन की प्रक्रिया में हम सभी को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए की हमने केवल इको-फ्रेंडली प्रतिमा ही स्थापित की हो जो की पर्यावरण को नुकसान न पहुँचाए।

इको-फ्रेंडली प्रतिमा पर्यावरण के लिए तो अच्छी होती ही है साथ ही हमे भी श्री गणेश के आशीर्वाद को सदा के लिए हमारे पास रखने की आज़ादी भी प्रदान करती है।

आईये बताते हैं कैसे – अगर आप इको-फ्रेंडली प्रतिमा नहीं लये हैं तो विसर्जन करने के लिए आपको बाहर ही जाना होगा क्यूंकि प्लास्टर ऑफ पैरिस से बनी प्रतिमा कभी भी पानी में नहीं गलती, किन्तु इको-फ्रेंडली प्रतिमा आप चाहें तो अपने घर में ही विसर्जित कर सकते हैं क्यूंकि यह तुरंत ही पानी में घुल के मिटटी में परिवर्तित हो जाती है।

प्रतिमा से प्राप्त मिट्टी को हम चाहें तो गमले में रख कर उसमे पौधा रोप सकते हैं और श्री गणेश का आशीर्वाद सदा के लिए हमारे घर में रहेगा। 

घर में करें गणेश विसर्जन की विधि 

गणेश विसर्जन

आपके द्वारा स्थापित की गयी गणेश प्रतिमा के आकृति और आकर के अनुसार बर्तन, बाल्टी, टब, ड्रम, टंकी आदि का चुनाव करें 
– उससे किसी साफ़ स्वच्छ स्थान पर रखें 
– सुनिश्चित करें की बर्तन, बाल्टी, टब, ड्रम, टंकी आदि बिलकुल साफ हो 
– इसमें बिल्कुल स्वच्छ जल भरें 
– जल में थोड़े से सुगन्धित फूल डालें, हो सके तो दो बूँद इत्र भी डालें 
– पास ही अगरबत्ती और धुप लगायें 
– पास ही एक पाट रखें और उस पर आसान बिछाएँ 
– श्री गणेश की पूजा कर धूम धाम से उन्हें विसर्जन स्थल तक लाएँ 
– ॐ गम गणपतये नमः का जब करें और पाट पर श्री गणेश को बिठायें 
– पूरी श्रद्धा से गणपति की पूजा करें और परिवार की मंगल कामना करें 
– नैवेध प्रसूतु कर नारियल बड़ा करें 
– श्री गणेश से आग्रह करें की अगले वर्ष वे फिर आपके घर पधारे और आपको सुख समृद्धि प्रदान करें 
– श्री गणेश की आरती करें 
– सभी लोग हाथ लगा कर धीरे से श्री गणेश की प्रतिमा को पानी में छोड़ दें 
– गणपति बपा मोरया का उदघोष करें 

कुछ समय में आपके द्वारा विसर्जित इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा मिट्टी के रूप में परिवर्तित हूँ जाएगी। मिटटी से पानी अलग कर लें और मिट्टी को गमले में डाल कर उसमें पौधा रोप दें। 

गणेश विसर्जन

जय गणेश 
हर घर गणेश, घर घर गणेश।


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श्री हनुमान चालीसा

-: दोहा :-
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमनु मुकुरु सुधारि
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार



हनुमान जी की आरती

आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

जाके बल से गिरिवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके।।


श्री शनि देव

Jagannathv
शनि चालीसा

॥दोहा॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज ।करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥

Jagannathv
शनि कवचं

अथ श्री शनिकवचम्
अस्य श्री शनैश्चरकवचस्तोत्रमंत्रस्य कश्यप ऋषिः IIअनुष्टुप् छन्दः II शनैश्चरो देवता II शीं शक्तिः II शूं कीलकम् II शनैश्चरप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः IIनिलांबरो नीलवपुः किरीटी गृध्रस्थितस्त्रासकरो धनुष्मान् II

श्री राम

Jagannathv

श्री राम चालीसा

श्री रघुवीर भक्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
निशिदिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहिं होई॥1॥
ध्यान धरे शिवजी मन माहीं। ब्रह्म इन्द्र पार नहिं पाहीं॥
दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहूं पुर जाना॥2॥

Jagannathv

आरती श्री राम जी

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।
नव कंज लोचन, कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन
कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्।
पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचि