Diwali 2019: [1st Day] Meaning of Dhanteras in Hindi [धनतेरस २०१९] – धनतेरस का अर्थ और कुछ कहानियाँ


Meaning of dhanteras in hindi 

धनतेरस ( Meaning of dhanteras in hindi )शब्द का अर्थ होता है धन और तेरस को मिला के बनाया गया है। ‘धन’ जो की देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है और ‘तेरस’ मतलब तेरवां दिन। धनतेरस माता लक्ष्मी के पूजा का दिन होता है जो की कृष्ण पक्ष (पूनम से अमावस्या की तरफ बढ़ते हुए) से तेरवें दिन आता है। धनतेरस पर सभी लोग अपने व्यवसायिक स्थलों और घरों को सजाते हैं और महूर्त के अनुसार लक्ष्मी पूजन किया जाता है।

धनतेरस पर सभी प्रकार की नयी वस्तुओं को खरीदना शुभ माना जाता है, और सभी बाजारों को सजाया जाता है। धनतेरस के दिन सभी प्रकार की वस्तुऐं जैसे की बर्तन, कपड़े, आभुषण, सोना, चांदी, वाहन आदि को खरीदा सौभाग्य की निशानी कहा गया है।

धनतेरस के पीछे की कुछ कहानियाँ

धनवंतरी की कहानी

Meaning of dhanteras in hindi 

Meaning of dhanteras in hindi

पुराणी लेखनी के अनुसार धनवंतरी एक महान चिकित्सक [Great doctor ] थे जिन्हे देवों का दर्जा प्राप्त था। मान्यताओं के अनुसार वे विष्णु भगवान का अवतार मने जाते हैं।

ऐसा भी कहा जाता है की समुद्र मंथन के समय जब शंकर भगवन ने विष पि लिया था तो वो धनवंतरी ही थे जिन्होंने महादेव को अमृत प्रदान किया था।

धनवंतरी का पृथ्वी पर आगमन समुद्र मंथन के समय हुआ था और इसलिये धनतेरस, दिपावली के दो दिन पहले धनवंतरी के जन्मदिन के रूप में भी मनाया जाता है।

धनवंतरी विष्णु के अवतार हैं और इनकी चार भुजाएँ हैं। दो भुजाओं में से एक में जलूका, औषधि और दूसरे में अमृत कलश है और बाकि दो भुजाओं में शंख और चक्र है।

धनवंतरी को स्मरण करने के लिए मन्त्र है
ॐ धन्वंतरये नमः॥

राजा हेमा उनके पुत्र यमराज और धनतेरस 

Meaning of dhanteras in hindi 

Meaning of dhanteras in hindi

राजा हेमा के पुत्र के बारे में सभी ज्योतिष्यों की राय थी की उसकी कुंडली कहती है की शादी के चौथे दिन उसकी मृत्यु सर्प के काटने से हो जाएगी। पुत्र की शादी के बाद जब उसकी पत्नी को यह पता चला तो उसने अपने पति को बचाने की ठान ली।

शादी के चौथे दिन रात्रि में राजा हेमा की पुत्रवधू ने पुरे महल में असंख्य दीप जलाए और पुरे महल को जगमग कर दिया, उसने जगह-जगह सोने चाँदी के आभूषण रखे ताकि उनसे टकरा कर दीपकों की रौशनी और भी बढ़ जाये।

राजा हेमा की पुत्रवधू ने मधुर संगीत का भी आयोजन किया, जब यमराज सर्प के रूप में राजा के पुत्र का जीवन हरण करने आए तो महल की चकचोँध रौशनी के कारण उनकी द्रष्टि चली गयी और वे पूरी रात धन-आभूषणों के ढेर पर बैठ कर संगीत सुनते रहे।

और इस प्रकार राजकुमार की जान बच गयी। और तभी से यह दिन धनतेरस  और ‘यमदीपदान’ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन यम सबकी लम्बी आयु की कामना की जाती है और उनके सम्मान में एक दीपक जलाया जाता है जो की पूरी रात प्रज्वलित किया जाता है।

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क्यों करें घर में गणेश विसर्जन?


श्री गणेश के लाखों भक्त है और गणेश चतुर्थी के उपलक्ष्य में भारत वर्ष के लगभग हर घर में गणपति जी की स्थापना की जाती है। हर घर गणेश, घर घर गणेश।

और जैसे की स्थापना की जाती है वैसे ही चतुर्थी की समाप्ति पर सभी भक्त गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन भी करते हैं। गणेश विसर्जन प्रतिक है बदलाव का।

किन्तु विसर्जन की प्रक्रिया में हम सभी को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए की हमने केवल इको-फ्रेंडली प्रतिमा ही स्थापित की हो जो की पर्यावरण को नुकसान न पहुँचाए।

इको-फ्रेंडली प्रतिमा पर्यावरण के लिए तो अच्छी होती ही है साथ ही हमे भी श्री गणेश के आशीर्वाद को सदा के लिए हमारे पास रखने की आज़ादी भी प्रदान करती है।

आईये बताते हैं कैसे – अगर आप इको-फ्रेंडली प्रतिमा नहीं लये हैं तो विसर्जन करने के लिए आपको बाहर ही जाना होगा क्यूंकि प्लास्टर ऑफ पैरिस से बनी प्रतिमा कभी भी पानी में नहीं गलती, किन्तु इको-फ्रेंडली प्रतिमा आप चाहें तो अपने घर में ही विसर्जित कर सकते हैं क्यूंकि यह तुरंत ही पानी में घुल के मिटटी में परिवर्तित हो जाती है।

प्रतिमा से प्राप्त मिट्टी को हम चाहें तो गमले में रख कर उसमे पौधा रोप सकते हैं और श्री गणेश का आशीर्वाद सदा के लिए हमारे घर में रहेगा। 

घर में करें गणेश विसर्जन की विधि 

गणेश विसर्जन

आपके द्वारा स्थापित की गयी गणेश प्रतिमा के आकृति और आकर के अनुसार बर्तन, बाल्टी, टब, ड्रम, टंकी आदि का चुनाव करें 
– उससे किसी साफ़ स्वच्छ स्थान पर रखें 
– सुनिश्चित करें की बर्तन, बाल्टी, टब, ड्रम, टंकी आदि बिलकुल साफ हो 
– इसमें बिल्कुल स्वच्छ जल भरें 
– जल में थोड़े से सुगन्धित फूल डालें, हो सके तो दो बूँद इत्र भी डालें 
– पास ही अगरबत्ती और धुप लगायें 
– पास ही एक पाट रखें और उस पर आसान बिछाएँ 
– श्री गणेश की पूजा कर धूम धाम से उन्हें विसर्जन स्थल तक लाएँ 
– ॐ गम गणपतये नमः का जब करें और पाट पर श्री गणेश को बिठायें 
– पूरी श्रद्धा से गणपति की पूजा करें और परिवार की मंगल कामना करें 
– नैवेध प्रसूतु कर नारियल बड़ा करें 
– श्री गणेश से आग्रह करें की अगले वर्ष वे फिर आपके घर पधारे और आपको सुख समृद्धि प्रदान करें 
– श्री गणेश की आरती करें 
– सभी लोग हाथ लगा कर धीरे से श्री गणेश की प्रतिमा को पानी में छोड़ दें 
– गणपति बपा मोरया का उदघोष करें 

कुछ समय में आपके द्वारा विसर्जित इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा मिट्टी के रूप में परिवर्तित हूँ जाएगी। मिटटी से पानी अलग कर लें और मिट्टी को गमले में डाल कर उसमें पौधा रोप दें। 

गणेश विसर्जन

जय गणेश 
हर घर गणेश, घर घर गणेश।


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हनुमान


श्री हनुमान चालीसा

-: दोहा :-
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमनु मुकुरु सुधारि
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार



हनुमान जी की आरती

आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

जाके बल से गिरिवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके।।


श्री शनि देव

Jagannathv
शनि चालीसा

॥दोहा॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज ।करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥

Jagannathv
शनि कवचं

अथ श्री शनिकवचम्
अस्य श्री शनैश्चरकवचस्तोत्रमंत्रस्य कश्यप ऋषिः IIअनुष्टुप् छन्दः II शनैश्चरो देवता II शीं शक्तिः II शूं कीलकम् II शनैश्चरप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः IIनिलांबरो नीलवपुः किरीटी गृध्रस्थितस्त्रासकरो धनुष्मान् II

श्री राम

Jagannathv

श्री राम चालीसा

श्री रघुवीर भक्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
निशिदिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहिं होई॥1॥
ध्यान धरे शिवजी मन माहीं। ब्रह्म इन्द्र पार नहिं पाहीं॥
दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहूं पुर जाना॥2॥

Jagannathv

आरती श्री राम जी

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।
नव कंज लोचन, कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन
कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्।
पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचि