20+ Best Diwali wishing quotes In English and Hindi


Here are some of the best diwali wishing quotes

दीयों की रौशनी से झिलमिलाता आँगन हो,
पटाकों की गूंजो से आसमान रोशन हो,
ऐसी आए झूम के ये दीवाली,
हर तरफ ख़ुशियों का मौसम हो…

हैप्पी दिवाली

Cherish the good times and the timeless memories made with friends this Diwali. Have a lovely festive time.
Happy Diwali!

best diwali wishing quotes
best diwali wishing quotes

तमाम जहाँ जगमगाया ,
फिर से त्यौहार रौशनी का आया ,
कोई तुम्हे हमसे पहले बधाइयाँ न दे दे ,
इसीलिए ,
यह पैगाम-ए-मुबारक सबसे पहले हमने है भिजवाया

“दिवाली की हार्दिक बधाई”

May the festival of joy become more beautiful for you and family. All your new ventures get success and progress.
Happy Diwali!

best diwali wishing quotes
best diwali wishing quotes

मुस्कुराते हँसते दीप तुम जलाना,
जीवन में नई खुशियों को लाना,
दुख दर्द अपने भूल कर,
सबको गले लगाना,
और प्यार से ये दीवाली मनाना

हैप्पी दिवाली

Happiness is in air its Diwali everywhere let’s show some love, care and wish everyone out there.
Shubh Diwali

दीवाली पर्व है खुशियों का,
उजालों का, माँ लक्ष्मी का
इस दीवाली आपकी जिंदगी खुशियों से भरी हो,
दुनिया उजालों से रोशन हो,
घर पर माँ लक्ष्मी का आगमन हो

हैप्पी दिवाली

Light a lamp of love!
Blast a chain of sorrow!
Shoot a rocket of prosperity!
Fire a flowerpot of happiness!
Wish you and your family sparking Diwali!

दीप जलते जगमगाते रहे,
हम आपको आप हमें याद आते रहे,
जब तक ज़िन्दगी है, दुआ है हमारी
आप यूँ ही दीये की तरह जगमगाते रहे………..
“दिवाली की हार्दिक बधाई”

Let’s make this Diwali joyous and bright,
Let’s celebrate in true sense this festival of light.
Happy Deepawali

जगमग थाली सजाओ,
मंगल दीपो को जलाओ,
अपने घरों और दिलों में आशा की किरण जगाओ,
खुशियों और समृद्धि से भरा हो आपका जीवन,
इसी कामना के साथ *_*_*_*_*_*_*_*_*_* शुभ दीपावली. आपको व आपके परिवार को दिपावली की हार्दिक बधाई व मंगलकामनाएं

May the beauty of the festival of lights fill your home with happiness and my the new year bring joy, peace, and prosperity in your life. Wish you and family a very Happy Diwali!!

फूल की शुरुआत कली से होती है,
ज़िन्दगी की शुरुआत प्यार से होती है,
प्यार की शुरुआत अपनों से होती है,
अपनों की शुरुआत आपसे होती है

Wish you all a very very happy diwali and hope that every person transform from the darkness to the happiness.

दीप जलते रहे,
मन से मन मिलते रहें,
गिले-शिकवे सारे दिल से निकलते रहें,
सारे विश्व भर में सुख शान्ति की प्रभात ले आए,
ये दीपों का त्यौहार ख़ुशी की सौगात ले आए…
शुभ दीपावली

May you get prosperity and fortune on this auspicious and pious occasion of Diwali.

एक दुआ मांगते हैं हम अपने भगवान् से,
चाहते हैं आपकी ख़ुशी पूरे ईमान से,
सब हसरतें पूरी हूँ आपकी,
और आप मुस्कुराएँ दिलो जान से

Hoping this Diwali turns out to be an extra special one for you and your dear ones and may success be always with you.

दीपावली में दीपों का दीदार हो,
और खुशियों की बौछार हो,
इस दिवाली में यही कामना है कि,
सफलता आपके कदम चूमे,
और खुशी आपके आसपास हो
शुभ दीपावली

Let each diya you light bring a glow of happiness on your face and enlighten your soul. Happy Diwali!

दीपावली आए तो रंगी रंगोली,
दीप जलाए, धूम धड़ाका, छोड़ा पटाखा,
जली फुलझडि़यां सबको भाए,
आप सबको दीपावली की शुभकामनाएं

Just like the colors of Rangoli, hope this Diwali brings fresh smiles, undiscovered avenues, different perspective and unbound happiness. Have a wonderful Diwali and a great New Year!

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[Shree Siddhivinayak Temple] भगवान गणेश को समर्पित सिद्धिविनायक मंदिर सपनों की नगरी मुंबई के प्रभादेवी में स्थित

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Teen Ankhowale ganesha ka mandir  ( राजस्थान सवाई माधोपुर )

यह स्वयंभू गणपति रणथंभौर जंगल में एक पहाड़ की चट्टान से प्रकट हुआ है जो समुद्र तल से 2000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यह मन्दिर


शुभ मंगल का प्रतिक स्वस्तिक 

स्वस्तिक पुरे युरेशिया (यूरोप और एशिया) में स्वस्तिक पुरातन धार्मिक चिन्ह के रूप में जाना जाता है। भारतीय संस्कृति में स्वस्तिक को देवत्य और आध्यात्मिकता के प्रतिक के रूप में उपयोग किया जाता रहा है।..


क्यों करें घर में गणेश विसर्जन?

श्री गणेश के लाखों भक्त है और गणेश चतुर्थी के उपलक्ष्य में भारत वर्ष के लगभग हर घर में गणपति जी की स्थापना की जाती है। हर घर गणेश, घर घर गणेश। और जैसे की स्थापना की जाती है…..


Bada Ganpati Indore | बड़ा गणपति इंदौर

बड़ा गणपति इंदौर – जैसा की नाम से प्रतीत होता है बड़ा गणपति मंदिर में श्री गणेश की विशाल मूर्ति है। मूर्ति की बड़े आकर के कारण भक्तों ने इसका नाम…..


गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है?

पुरे विश्व में गणेश चतुर्थी को बड़े हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है और सभी गणेश भक्त 10 दिनों तक गणपति की बड़ी सेवा करते हैं। श्री गणेश, महादेव


घूमतेगणेश की जानकारी

आमंत्रण
आमंत्रण

घूमते गणेश आयोजन में मंगलमूर्ति श्रीगणेश को आमंत्रित करने के लिए यजमान को शहर के बंधू बांधवो को आमंत्रित करना होगा ताकि अधिक से अधिक लोग आशीर्वाद ले सके साथ ही गणराज भी भक्तो की भीड़ से आनंदित हो उठे , तीन दिनों के इस आयोजन में विघ्हर्ता के सिंहासन को सजा कर , भक्तो और गणपति.......


कहाँ कहाँ जायेंगे
कहाँ कहाँ जायेंगे

घूमते गणेश आयोजन के तहत मंगलमूर्ति गणराज अपने भक्तों के आमंत्रण पर उनके आयोजनों में सम्मिलित होंगे, जैसे शादी, फैक्ट्री का शुभ आरंभ, नये व्यव्साय का आरम्भ या कोई और शुभ अवसर और अपने आशीर्वाद से उस आयोजन को अभूतपूर्व बनाएंगे और सफलता का आशीर्वाद प्रदान करेंगे।.........


श्री गणेश


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[Khajrana Ganesh Temple, Indore] खजराना गणेश मंदिर इंदौर का इतिहास और जानकारी | History Of Khajrana Ganesh Temple in Indore

मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरो में से एक, इंदौर एक खूबसूरत शहर है जो हरे-भरे हरियाली



महादेव के पहनावे और उस के पीछे के रहस्य – ऐसे तथ्य जो शायद आपको नहीं पता 


महादेव चित्र में आपने देखा होगा की वो शरीर के निचले हिस्से में व्याघ्र चर्म से लपेटे रहते हैं, देह पर भस्म है, एक हाथ में डमरू और दुसरे में त्रिशूल है, मस्तिष्क पर तिसरी आंख है और गले में रुद्राक्ष की माला है सर्प भी लिप्त हुआ है। वे कैलाश पर्वत पर बैठे हैं और वृषभ की सवारी करते हैं। जटाएँ काफ़ी बड़ी हैं और उनमे आधा चंद्र है  साथ ही केशों से गंगा निकल रही है। 

 

आइये हम इन सभी चिन्हों के पीछे छुपे रहस्य और उनके अर्थों से आपका परिचय करते हैं 

महादेव
– महादेव देह पर दो प्रकार की चार्म धारण करते हैं हस्ति चर्म और व्याघ्र चर्म। हस्ति चर्म हाथी की चार्म होती है, हाथी में उसके विशाल और बलशाली शरीर के कारण अहंकार होता है। व्याघ्र चर्म शेर के चार्म को कहा जाता है और शेर बहुत ही हिंसक प्रवृति का होता है। शिव जी हस्ति चर्म और व्याघ्र चर्म धारण भी करते हैं और उस पर विराजमान भी होते हैं जिसका अर्थ होता है की महादेव का अहंकार और हिंसा दोनों पर ही पूरा नियंत्रण है। यह सभी शिव भक्तों को अहंकार और हिंसा पर नियंत्रण रख उसे दबाने के लिए प्रेरित करता है। 
 
महादेव
 
– देह पर भस्म – भस्म बदलाव का प्रतिक है। भस्म अंत का प्रतीक है।सुन्दर या कुरूप, विशाल या सुक्ष्म, उपयोगी या अनुपयोगी, जीवित या मृत, चलित या स्थायी, आमिर या गरीब, स्वस्थ या बीमार एक दिन सब कुछ भस्म के रूप में बदल जायेगा। महादेव हमे बताना कहते हैं की जब संसार में सब कुछ भस्म हो जायेगा तब केवल भस्म ही शेष रह जाएगी। भस्म मोह, आकर्षण, लालच, ईर्ष्या से मुक्ति का सन्देश देती है।
 
 
महादेव
– महादेव के एक हाथ में त्रिशूल रहता है – त्रिशूल में एक ही दिशा में प्रहार करने वाली तीन नोंक शूल होती हैं जो की एक ही वॉर में तीन लक्ष्यों को भेद सकती हैं। हम त्रिशूल को तीन शाक्तियों का एक में समावेश वाले अस्त्र के रूप में भी देख सकते हैं। जैसे की त्रिदेव, हमारे तीन देव – ब्रह्माः, विष्णु और महेश। तीन देवियां सरस्वती, लक्ष्मी और काली। प्रकृति के तीन रूप सृजन, अनुरक्षण और विनाश। तीन काल – भुत, वर्तमान और भविष्य। तीन शक्तियां – सत, रज और तम। तीन लोक – स्वर्ग लोक , भू लोक और पातळ लोक। तीन मनोस्थिती – ईच्छा, कर्म और विवेक। तीन प्रकार के कष्ट – शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक। त्रिशूल बताता है की शिव तीनों भूमिकाओं के अधिपति हैं। 
महादेव
–  महादेव के एक हाथ में डमरू रहता है  – महादेव को संगीत का जनक भी मन जाता है। जब महादेव आनंद फैलाना कहते हैं तब वे डमरू बजाते हैं और नृत्य करते हैं। डमरू हम मनुष्यों को अपने दैनिक कर्त्तव्यों बीच समय निकाल प्रसन और आनंदित होने का संकेत देता है। 
 
महादेव
– मस्तिष्क पर तिसरी आंख – जिसे त्रिनेत्र भी कहते हैं और महादेव को ‘त्रिलोचन’ भी कहा जाता है। शिव जी का तीसरा नेत्र आधा बंद और आधा खुला हुआ है जो हमे संसार और सन्यास का सन्देश देता है की ध्यान-साधना या संन्यास में रहकर भी संसार की जिम्मेदारियों को निभाया जा सकता है। 

 

महादेव

– गले में सर्प – ऐसा माना जाता है की समुद्र मंथन के समय जब विष निकला तो देवता और असुर दोनो ही भयभीत हो गये और महादेव गए की वे ही कोई रास्ता सुझाएँ। विश्व की रक्षा करने के लिए शिव जी ने विष पि लिया किन्तु इससे पहले की वे विष निगल पाते पार्वती जी ने उनके कंठ को दबा दिया और विष के कारण महादेव का कंठ नीला पड़ गया। नीले कंठ के कारण  महादेव को नीलकंठ भी कहा जाता है। पार्वती जी के लिये सदा ही शिव जी के कंठ को दबा के रखना संभव नहीं था और इसलिए उन्होंने सर्प को शिव जी के गले में बांध दिया। कुछ और मान्यताओं के अनुसार शिव जी के गले में सर्प महादेव की डर और मृत्यु पर नियंत्रण को दर्शाता है। शिव जी को पशुपतिनाथ भी कहा जाता है जिसका अर्थ होता है सभी जिव-जन्तुओं के स्वामी। 

महादेव
– रुद्राक्ष की माला – ऐसा माना जाता है की रुद्राक्ष की उत्पत्ति शिव के आँसुओं से हुई थी। रुद्राक्ष में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है जो की शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक ऊर्जा का संतुलन बनाये रखता है। रुद्राक्ष की माला से मंत्र जाप करने से मंत्र का असर कई गुना बढ़ जाता है और ग्रहों को नियंत्रित करने के लिए सबसे रुद्राक्ष को सबसे उत्तम माना गया है।  
महादेव
शिव की सवारी नन्दी

– शिव की सवारी नन्दी – शिलाद ऋषि को महादेव की तपस्या कर नन्दी नामक पुत्र की प्राप्ति हुई। एक बार उनके आश्रम पर दो संन्यासियों का आगमन हुआ और नन्दी की सेवा से प्रसन हो कर उन्होंने शिलाद ऋषि को दीर्घायु होने का आशीर्वाद दिया। शिलाद ऋषि ने जब इसका कारण पुछा को संन्यासियों ने कहा की नन्दी अल्पायु है यह सुन शिलाद ऋषि काफी चिंतित रहने लगे। जब नन्दी को पिता की चिंता का कारण पता चला तो उन्होंने शिव जी की घोर तपस्या की। महादेव नन्दी से प्रसन हुऐ और नन्दी को वरदान माँगने को कहा, इस पर नन्दी ने कहा की वो सारा जीवन महादेव के साथ रह कर उनकी सेवा करना चाहता है। शिव जी नन्दी से बहुत प्रसन हुऐ और उन्होंने नंदी को अपना परम मित्र बनाया और बैल का स्वरूप दे अपने वाहन के रूप में स्थान दिया।

महादेव
कैलाश पर्वत

– कैलाश पर्वत – महादेव के बारे में यह कहा जाता है की वे कैलाश पर्वत पर विराजमान हैं। कैलाश पर्वत हिमालय पर्वत श्रंखला में है और बहुत ही पवित्र माना जाता है। कैलाश पर्वत उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव  बिलकुल बीच में स्थित है और इसलिए इसे धरती का केंद्र भी कहा जाता है। कैलाश को दुनिया की नाभि या आकाशीय ध्रुव और भौगोलिक ध्रुव का केंद्र भी माना जाता है। यह आकाश और पृथ्वी के बीच एक ऐसा बिंदु है जहाँ दसों दिशाएँ मिल जाती हैं। कैलाश पर्वत अलौकिक शक्ति का केंद्र है। कैलाश पर्वत पर मानसरोवर जो की सूर्य के आकर की दुनिया की शुद्ध पानी की उच्चतम झीलों में से एक है और दुनिया की उच्चतम खारे पानी की झीलों में से एक राक्षस जो की चंद्र के आकर की है, स्थित हैं। ये दोनों झीलेँ  सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा को दर्शाती हैं। दक्षिण से देखने पर एक स्वस्तिक चिह्न देखा जा सकता है। ऊपरोक्त सभी बातें कैलाश पर्वत को रहस्य्मय बनती हैं। 

महादेव

महादेव की जटाओं चंद्रमा और गंगा – समुद्र मंथन के समय जब शिव जी ने विष पि लिया था तो  शरीर का तापमान बढ़ने लगा और तापमान को काम करने लिए शिव जी ने चन्द्रमा को अपनी जटाओं धारण कर लिया। चन्द्रमा को मन का करक भी कहा गया है और शिव जी हमे चन्द्रमा की शीतल प्रवृति के अनुसार अपने मन को शांत रखने का सन्देश हैं। महादेव की जटाओं से गंगा का प्रवाह हमे अहँकार से बचने का संदेश देता है। इसके पीछे की मान्यता है की जब राजा भागीरथ ने गंगा से पृथ्वी पर आने का आग्रह किया तो गंगा ने कहा की अगर वे सीधे स्वर्ग से पृथ्वी पर आयेंगी तो पृथ्वी उनके वेग से ध्वस्त हो जाएगी। राजा भागीरथ ने यह बात भोलेनाथ को बताई और कहा की अब आप ही संसार के उद्दार के लिए के लिये कुछ करें। महादेव ने गंगा को स्वर्ग से अपने सिर पर उतरने को कहा और फिर उसे अपनी जटाओं में कैद कर लिया। गंगा सब कुछ करने के बाद भी शिव जी की जटाओं से निकल ना सकी और अपने अहँकार के लिए क्षमा माँगी। तब शिव ने अपनी जटाओं से गंगा को एक पोखर में छोड़ा और फिर गंगा वहाँ से सात धाराओं में प्रवाहित हुई


महादेव के पहनावे और उस के पीछे के रहस्य – ऐसे तथ्य जो शायद आपको नहीं पता 

महादेव चित्र में आपने देखा होगा की वो शरीर के निचले हिस्से में व्याघ्र चर्म से लपेटे रहते हैं, देह पर भस्म है, एक हाथ में डमरू और दुसरे में त्रिशूल है, मस्तिष्क पर तिसरी आंख है और गले में रुद्राक्ष की माला है सर्प भी लिप्त हुआ है। वे कैलाश पर्वत पर बैठे हैं […]


[Khajrana Ganesh Temple, Indore] खजराना गणेश मंदिर इंदौर का इतिहास और जानकारी | History Of Khajrana Ganesh Temple in Indore

मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरो में से एक, इंदौर एक खूबसूरत शहर है जो हरे-भरे हरियाली


[Shree Siddhivinayak Temple] भगवान गणेश को समर्पित सिद्धिविनायक मंदिर सपनों की नगरी मुंबई के प्रभादेवी में स्थित

श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर एक हिंदू मंदिर है जो भगवान श्री गणेश को समर्पित है। श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर..


Mehandipur balaji maharaj

Mehandipur balaji maharaj | पवित्र और चमत्कारिक मेहंदीपुर बालाजी महराज की सम्पूर्ण कथा!!!!!

Mehandipur balaji maharaj राजस्थान के सवाई माधोपुर और जयपुर की  सीमा रेखा पर स्थित मेहंदीपुर बालाजी ( Mehandipur balaji maharaj )कस्बे में बालाजी का एक अतिप्रसिद्ध तथा प्रख्यात मन्दिर है जिसे “श्री मेंहदीपुर बालाजी मन्दिर” के नाम से जाना जाता है।  भूत प्रेतादि ऊपरी बाधाओं के निवारणार्थ यहांँ आने वालों का ताँंता लगा रहता है। […]


Shree Sankat mochan hanuman ji

श्री संकट मोचन हनुमान जी  ( Shree Sankat mochan hanuman ji ) देश के ऐतिहासिक मंदिरों में शामिल काशी के संकट मोचन मंदिर ( Shree Sankat mochan hanuman ji ) का इतिहास करीब 400 साल पुराना है। इसी मंदिर में हनुमान ने राम भक्त गोस्वामी तुलसीदास को दर्शन दिए थे, जिसके बाद बजरंगबली मिट्टी का स्वरूप […]


भगवान श्री कृष्ण और गोपियों की सुन्दर और दुर्लभ सत्य कथा

भगवान श्री कृष्ण और गोपियों की सुन्दर और दुर्लभ सत्य कथा एक बार गोपियों ने श्री कृष्ण से कहा की ‘हे कृष्ण हमे अगस्त्य ऋषि को भोग लगाने जाना है, और ये यमुना जी बीच में पड़ती है अब बताओ कैसे जाये भगवान श्री कृष्ण ने कहा की जब तुम यमुना जी के पास जाओ […]


महादेव


महादेव के पहनावे और उस के पीछे के रहस्य – ऐसे तथ्य जो शायद आपको नहीं पता 

महादेव चित्र में आपने देखा होगा की वो शरीर के निचले हिस्से में व्याघ्र चर्म से लपेटे रहते हैं, देह पर भस्म है, एक हाथ में डमरू और दुसरे में त्रिशूल है, मस्तिष्क पर तिसरी आंख है और गले में रुद्राक्ष की माला है सर्प भी लिप्त हुआ है। वे कैलाश पर्वत पर बैठे हैं […]



Ambernath shiv temple कोंकण का सबसे प्राचीन शिव मंदिर – अम्बरनाथ / अमब्रेश्वर शिव मंदिर 

Ambernath shiv temple अम्बरनाथ / अमब्रेश्वर शिव मंदिर मुंबई के पास अम्बरनाथ में स्थित है जिसे की यूनेस्को ने सांस्कृतिक विरासत का स्थान दिया है। अम्बरनाथ / अमब्रेश्वर शिव मंदिर के बारे में मान्यता है की यहाँ महादेव और पार्वती जी के दर्शन करने से संतान की कामना पूर्ण होती है। मंदिर का निर्माण 1060 […]


हनुमान


श्री हनुमान चालीसा

-: दोहा :-
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमनु मुकुरु सुधारि
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार



हनुमान जी की आरती

आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

जाके बल से गिरिवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके।।


श्री शनि देव

Jagannathv
शनि चालीसा

॥दोहा॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज ।करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥

Jagannathv
शनि कवचं

अथ श्री शनिकवचम्
अस्य श्री शनैश्चरकवचस्तोत्रमंत्रस्य कश्यप ऋषिः IIअनुष्टुप् छन्दः II शनैश्चरो देवता II शीं शक्तिः II शूं कीलकम् II शनैश्चरप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः IIनिलांबरो नीलवपुः किरीटी गृध्रस्थितस्त्रासकरो धनुष्मान् II

श्री राम

Jagannathv

श्री राम चालीसा

श्री रघुवीर भक्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
निशिदिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहिं होई॥1॥
ध्यान धरे शिवजी मन माहीं। ब्रह्म इन्द्र पार नहिं पाहीं॥
दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहूं पुर जाना॥2॥

Jagannathv

आरती श्री राम जी

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।
नव कंज लोचन, कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन
कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्।
पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचि