9 days of navratri colours : 2019


नवरात्री के नौ दिनों के नौ रंग  

9 days of navratri colours

पहला दिन – माता के शैलपुत्री रूप को समर्पित है। पर्वतों के राजा हिमवान की बेटी भवानी, पार्वती या हेमावती को ‘शैलपुत्री‘ भी कहा जाता है क्यूंकि “शैल” का अर्थ है पहाड़, “पुत्री” का अर्थ है बेटी। नवरात्री के पहले दिन का रंग है धूसर या ग्रे है।

दूसरा दिन  माता के ब्रह्माचारिणी रूप को समर्पित है। ब्रह्म’ का अर्थ होता है ‘तप’, अर्थार्त नवदुर्गा का दूसरा रूप तपस्या और अच्छे आचरण का पालन दर्शाता है। नवरात्री के दूसरे  दिन का रंग है नारंगी है।

तीसरा दिन माता के चंद्रघन्टा रूप को समर्पित है। इस रूप में दुर्गा माँ के माथे पर चंद्र या आधा चाँद जो की घंटी के आकर में है सुशोभित होता है। यह रूप जीवन में शांति और समृद्धि के प्रतिक मन गया है। और पूर्णमासी के चन्द्रमा के रंग सामान ही तीसरे दिन का रंग सफ़ेद है।

चौथा दिन माता के कुष्मांडा रूप को समर्पित है। कु का अर्थ होता है थोड़ा , ऊष्मा का गर्मी और ब्रह्माण्ड शब्द से मांडा लिया गया है पुरे नाम का अर्थ होता है लौकिक ऊष्मा जो की ब्रह्माण्ड का निर्माण करती है। नवरात्री के चौथे दिन का रंग लाल है।

पाँचवा दिन ( 5th day of navratri 2019 ) माता के स्कन्द रूप को समर्पित है। इस रूप में माता अपने पुत्र स्कन्द को साथ लिए है जो की बाल रूप में है। ऐसा कहा जाता है की स्कंदमाता के शील से मूर्ख भी ज्ञान का सागर बन जाता है। नवरात्री के पाँचवे दिन का आसमानी नीला है।

छठा दिन  माता के कात्यायनी ( 9 days of navratri colours ) रूप को समर्पित है। काटा ऋषि ने माँ से देवी के रूप में बेटी की कामना की। उनकी इच्छा को पूरा करने लिये माँ ने उनके घर बेटी के रूप में जन्म लिया और कात्यायनी कहलायी थी। नवरात्री के छठे दिन का रंग गुलाबी है।

9 days of navratri colours
9 days of navratri colours

सातवां दिन  माता के कालरात्रि रूप को समर्पित है।अज्ञानता और अंधकार का नाश करने वाला रूप। अंधकार जैसा गहरा रंग, अव्यवस्थित बाल, आक्रामक मुद्रा, सांसो से उज्ज्वल और भयानक निकलती लपटें। यह देवी का सबसे क्रूर रूप है और दानव / राक्षसों को मारने के लिए काला हो जाता है। नवरात्री के सांतवे दिन का रंग गहरा नीला  है।

आंठवा दिन  माता के महागौरी रूप को समर्पित है। जब महादेव ने उन्हें गंगा के पवित्र जल से साफ़ किया तो देवी ने अपने सूंदर रूप को वापस पा लिया और अत्यंत श्वेत रंग के कारण महागौरी कहलायी। नवरात्री के आंठवा दिन का रंग पीला है।

नौवां दिन – ( 9 days of navratri colours ) माता के सिद्धिदात्री रूप को समर्पित है। यह माता का अंतिम रूप है और सभी सिद्धिंयों की अधिकारी हैं।  नवरात्री के नौवां दिन का रंग हरा है।

अब आप नवरात्री के नौ दिन माँ के नौ रूपों के अनुसार रंगों का चुनाव कर पहन सकते हैं।

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क्यों करें घर में गणेश विसर्जन?


श्री गणेश के लाखों भक्त है और गणेश चतुर्थी के उपलक्ष्य में भारत वर्ष के लगभग हर घर में गणपति जी की स्थापना की जाती है। हर घर गणेश, घर घर गणेश।

और जैसे की स्थापना की जाती है वैसे ही चतुर्थी की समाप्ति पर सभी भक्त गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन भी करते हैं। गणेश विसर्जन प्रतिक है बदलाव का।

किन्तु विसर्जन की प्रक्रिया में हम सभी को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए की हमने केवल इको-फ्रेंडली प्रतिमा ही स्थापित की हो जो की पर्यावरण को नुकसान न पहुँचाए।

इको-फ्रेंडली प्रतिमा पर्यावरण के लिए तो अच्छी होती ही है साथ ही हमे भी श्री गणेश के आशीर्वाद को सदा के लिए हमारे पास रखने की आज़ादी भी प्रदान करती है।

आईये बताते हैं कैसे – अगर आप इको-फ्रेंडली प्रतिमा नहीं लये हैं तो विसर्जन करने के लिए आपको बाहर ही जाना होगा क्यूंकि प्लास्टर ऑफ पैरिस से बनी प्रतिमा कभी भी पानी में नहीं गलती, किन्तु इको-फ्रेंडली प्रतिमा आप चाहें तो अपने घर में ही विसर्जित कर सकते हैं क्यूंकि यह तुरंत ही पानी में घुल के मिटटी में परिवर्तित हो जाती है।

प्रतिमा से प्राप्त मिट्टी को हम चाहें तो गमले में रख कर उसमे पौधा रोप सकते हैं और श्री गणेश का आशीर्वाद सदा के लिए हमारे घर में रहेगा। 

घर में करें गणेश विसर्जन की विधि 

गणेश विसर्जन

आपके द्वारा स्थापित की गयी गणेश प्रतिमा के आकृति और आकर के अनुसार बर्तन, बाल्टी, टब, ड्रम, टंकी आदि का चुनाव करें 
– उससे किसी साफ़ स्वच्छ स्थान पर रखें 
– सुनिश्चित करें की बर्तन, बाल्टी, टब, ड्रम, टंकी आदि बिलकुल साफ हो 
– इसमें बिल्कुल स्वच्छ जल भरें 
– जल में थोड़े से सुगन्धित फूल डालें, हो सके तो दो बूँद इत्र भी डालें 
– पास ही अगरबत्ती और धुप लगायें 
– पास ही एक पाट रखें और उस पर आसान बिछाएँ 
– श्री गणेश की पूजा कर धूम धाम से उन्हें विसर्जन स्थल तक लाएँ 
– ॐ गम गणपतये नमः का जब करें और पाट पर श्री गणेश को बिठायें 
– पूरी श्रद्धा से गणपति की पूजा करें और परिवार की मंगल कामना करें 
– नैवेध प्रसूतु कर नारियल बड़ा करें 
– श्री गणेश से आग्रह करें की अगले वर्ष वे फिर आपके घर पधारे और आपको सुख समृद्धि प्रदान करें 
– श्री गणेश की आरती करें 
– सभी लोग हाथ लगा कर धीरे से श्री गणेश की प्रतिमा को पानी में छोड़ दें 
– गणपति बपा मोरया का उदघोष करें 

कुछ समय में आपके द्वारा विसर्जित इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा मिट्टी के रूप में परिवर्तित हूँ जाएगी। मिटटी से पानी अलग कर लें और मिट्टी को गमले में डाल कर उसमें पौधा रोप दें। 

गणेश विसर्जन

जय गणेश 
हर घर गणेश, घर घर गणेश।


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हनुमान


श्री हनुमान चालीसा

-: दोहा :-
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमनु मुकुरु सुधारि
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार



हनुमान जी की आरती

आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

जाके बल से गिरिवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके।।


श्री शनि देव

Jagannathv
शनि चालीसा

॥दोहा॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज ।करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥

Jagannathv
शनि कवचं

अथ श्री शनिकवचम्
अस्य श्री शनैश्चरकवचस्तोत्रमंत्रस्य कश्यप ऋषिः IIअनुष्टुप् छन्दः II शनैश्चरो देवता II शीं शक्तिः II शूं कीलकम् II शनैश्चरप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः IIनिलांबरो नीलवपुः किरीटी गृध्रस्थितस्त्रासकरो धनुष्मान् II

श्री राम

Jagannathv

श्री राम चालीसा

श्री रघुवीर भक्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
निशिदिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहिं होई॥1॥
ध्यान धरे शिवजी मन माहीं। ब्रह्म इन्द्र पार नहिं पाहीं॥
दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहूं पुर जाना॥2॥

Jagannathv

आरती श्री राम जी

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।
नव कंज लोचन, कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन
कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्।
पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचि