हे गजानंद महाराज


हे गजानंद महाराज
हे गजानंद महाराज

हे गजानंद महाराज घर म्हारे बेगा आ जाओ,
थारे आया बात बणसी बेगा आ जाओ,

सबसे पहले तुमको ध्याते,गणनायक गणराज,
जल्दी आकर काम बनाते,देवों के सरताज,
रिद्धि सिद्धि के दाता,घर म्हारे बेगा आ जाओ…थारे आया,

मूसे की असवारी सोहे,गणनायक महाराज,
रूप थारो मनड़ो मोहे,भक्तों के भरतार,
भरी सभा में आके म्हारी,लाज बचा जाओ…थारे आया,

हर कीर्तन को पहले आके,सफल बनाते हो,
इसीलिए देवों में पहले,पूजे जाते हो,
दुखियारे इस “राज” को आशीष दे जाओ…थारे आया,

घुमतेगणेश.कॉम में गणेश मन्त्र , शिवा मंत्र , हनुमान मंत्र सभी तरह के मन्त्र है, और भी गणेश भजन्स , शिव भजन्स , गणेश चालीसा , शिव चालीसा, हनुमान चालीसा , हर तरह के चालीसा हमारे वेबसाइट पर है,गणेश जी की हर तरह की जानकारी है | हमने गणेश चतुर्थी के सम्बन्ध में सबकुछ जानकारी इस वेबसाइट पर डाली है महाशिवरात्रि पर अवश्य पढ़े

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तीन आंखों वाले श्री गणेश का मंदिर ( राजस्थान सवाई माधोपुर )

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शुभ मंगल का प्रतिक स्वस्तिक 

स्वस्तिक पुरे युरेशिया (यूरोप और एशिया) में स्वस्तिक पुरातन धार्मिक चिन्ह के रूप में जाना जाता है। भारतीय संस्कृति में स्वस्तिक को देवत्य और आध्यात्मिकता के प्रतिक के रूप में उपयोग किया जाता रहा है।..


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बड़ा गणपति इंदौर – जैसा की नाम से प्रतीत होता है बड़ा गणपति मंदिर में श्री गणेश की विशाल मूर्ति है। मूर्ति की बड़े आकर के कारण भक्तों ने इसका नाम…..


गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है?

पुरे विश्व में गणेश चतुर्थी को बड़े हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है और सभी गणेश भक्त 10 दिनों तक गणपति की बड़ी सेवा करते हैं। श्री गणेश, महादेव


मिट्टी के गणेश जी कैसे बनाते हैं

आगामी 2 सितम्बर 2019 को हम सभी के चहेते श्री गणेश का आगमन गणेश चतुर्थी के आरम्भ के साथ हमारे बिच होगा। हर उम्र हर वर्ग और सिर्फ भारत ही नहीं विदेशों में भी गणपति जी का स्वागत बड़ी ही धूम-धाम और हर्ष..


घूमतेगणेश की जानकारी

आमंत्रण
आमंत्रण

घूमते गणेश आयोजन में मंगलमूर्ति श्रीगणेश को आमंत्रित करने के लिए यजमान को शहर के बंधू बांधवो को आमंत्रित करना होगा ताकि अधिक से अधिक लोग आशीर्वाद ले सके साथ ही गणराज भी भक्तो की भीड़ से आनंदित हो उठे , तीन दिनों के इस आयोजन में विघ्हर्ता के सिंहासन को सजा कर , भक्तो और गणपति.......


कहाँ कहाँ जायेंगे
कहाँ कहाँ जायेंगे

घूमते गणेश आयोजन के तहत मंगलमूर्ति गणराज अपने भक्तों के आमंत्रण पर उनके आयोजनों में सम्मिलित होंगे, जैसे शादी, फैक्ट्री का शुभ आरंभ, नये व्यव्साय का आरम्भ या कोई और शुभ अवसर और अपने आशीर्वाद से उस आयोजन को अभूतपूर्व बनाएंगे और सफलता का आशीर्वाद प्रदान करेंगे।.........


श्री गणेश


तीन आंखों वाले श्री गणेश का मंदिर ( राजस्थान सवाई माधोपुर )

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Ganesha Sketch

Ganesha Sketch Here is very beautiful  sketch of Ganesh. These Ganesha sketch are  designed by the sketch Artist Sumeet kale during the period of ganesh chaturthi 2019. 



एशिया का सबसे ऊँचा शिव मंदिर – जटोली शिव मंदिर [Asia’s tallest Shiva temple – Jatoli Shiva Temple]


Asia’s tallest Shiva temple – Jatoli Shiva Temple

हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में स्थित एशिया का सबसे ऊँचा शिव मंदिर

जटोली शिव मंदिर 

पहाड़ की पर निर्मित बहुत ही भव्य और शानदार शिव मंदिर जो की दक्षिण-द्रविड़ शैली में बनाया गया है। इस मंदिर का निर्माण जनता के सहयोग से 1974 में किया गया था। जटोली शिव-मंदिर सोलन से करीब सात किलोमीटर दूर है और मंदिर में दर्शन करने के लिए भक्तों को 100 सीढ़ियां चढ़ कर पहुँचाना होता है। मंदिर में कला और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को है। जटोली शिव-मंदिर उत्तर भारत बनाया गया है पर इसकी निर्माण शैली बिल्कुल दक्षिण भारत की है। मंदिर की ऊंचाई 111 फिट है और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार यह मंदिर एशिया के सबसे ऊँछे मंदिरों में शामिल है। मंदिर के अंदर स्फटिक से निर्मित शिव लिंग स्थापित किये गए हैं और मंदिर में चारों तरफ विभिन्न देवी देवतों के मूर्तियां हैं।  

शिव मंदिर
एशिया का सबसे ऊँचा शिव मंदिर

बाबा कृष्णानंद परमहंस के दिशा-निर्देश और मार्गदर्शन पर जटोली शिव मंदिर के स्थापना करि गयी थी। बाबा कृष्णानंद परमहंस ने मंदिर वाले स्थान पर तपस्या भी करी थी और मान्यताओं के अनुसार शिवजी ने इस स्थान पर कुछ समय विश्राम किया था। बाबा कृष्णानंद परमहंस ने शिव जी की आराधना करी और उनके त्रिशूल से प्रहार कर पानी निकला जिससे की इलाके में रहने वाले लोगों को पानी की समस्या से निदान मिला। मंदिर के उतर पूर्व कोने में आज भी वह पवित्र जल कुंड है और कुंड के पानी में कई प्रकार में औषधीय गुण पाए जाते हैं। मंदिर के बाहरी प्रांगण में नंदी की विशालकाय मूर्ति भी है। 


एशिया का सबसे ऊँचा शिव मंदिर – जटोली शिव मंदिर [Asia’s tallest Shiva temple – Jatoli Shiva Temple]

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तुलसी और भगवान शालिग्राम (विष्णु या उनके अवतार, श्रीकृष्ण) की शादी कार्तिक महीने (अक्टूबर – नवंबर) में मनाया जाने वाला एक लोकप्रिय हिंदू अनुष्ठान है। तुलसी विवाह विधि पूजा प्रक्रिया : दीपावली त्योहार के बाद पड़ने वाली एकादशी पर पूजा होती है। कुछ लोग इसे पूर्णिमा के दिन करते हैं।तुलसी विवाह के लिए आवश्यक दो […]


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महादेव


एशिया का सबसे ऊँचा शिव मंदिर – जटोली शिव मंदिर [Asia’s tallest Shiva temple – Jatoli Shiva Temple]

पहाड़ की पर निर्मित बहुत ही भव्य और शानदार शिव मंदिर जो की दक्षिण-द्रविड़ शैली में बनाया गया है। इस मंदिर का निर्माण जनता के सहयोग से 1974 में किया गया था। जटोली…..



शिवलिंग का अर्थ और उससे जुड़ी मान्यताऐं 

जानकारी और ज्ञान के आभाव के कारण शिवलिंग को कुछ लोग पुरुष के शरीर के एक अंग से सम्बंधित कर भ्रमित करते हैं जबकि यह सच नहीं है। भारत की संस्कृति …….


हनुमान


श्री हनुमान चालीसा

-: दोहा :-
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमनु मुकुरु सुधारि
बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार



हनुमान जी की आरती

आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

जाके बल से गिरिवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके।।


श्री शनि देव

Jagannathv
शनि चालीसा

॥दोहा॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज ।करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥

Jagannathv
शनि कवचं

अथ श्री शनिकवचम्
अस्य श्री शनैश्चरकवचस्तोत्रमंत्रस्य कश्यप ऋषिः IIअनुष्टुप् छन्दः II शनैश्चरो देवता II शीं शक्तिः II शूं कीलकम् II शनैश्चरप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः IIनिलांबरो नीलवपुः किरीटी गृध्रस्थितस्त्रासकरो धनुष्मान् II

श्री राम

Jagannathv

श्री राम चालीसा

श्री रघुवीर भक्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
निशिदिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहिं होई॥1॥
ध्यान धरे शिवजी मन माहीं। ब्रह्म इन्द्र पार नहिं पाहीं॥
दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहूं पुर जाना॥2॥

Jagannathv

आरती श्री राम जी

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।
नव कंज लोचन, कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन
कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्।
पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचि