गणेश के 8 प्रसिद्ध मंदिर

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श्री सिद्धिविनायक मंदिर (मुंबई )

सन 1801 श्री लक्ष्मण वितु और देऊबाई पाटिल ने बनवाया था तब से आज तक देश विदेश में श्री सिद्धिविनायक मंदिर काफी प्रसिद्ध है और लाखों की संख्या में भक्त श्री सिद्धिविनायक के दर्शन करने आते हैं. इन श्रद्धुलों में बड़े- बड़े राजनेता, अभिनेता, खिलाड़ी, बिजनेसमैन अदि शामिल हैं. श्री सिद्धिविनायक की प्रसिद्धि विदेशो से भी बड़े बड़े लोगों को अपनी और आकर्षित करती है.टीम कुक जो की एप्पल नमक एक बहुत बड़ी कम्पनी के सीईओ हैं जब वे वर्ष 2016 में पहेली बार भारत आये तो उन्होंने अपनी भारत यात्रा का शुभारंभ सबसे पहले श्री सिद्धिविनायक के दर्शन व आशीर्वाद प्राप्त कर किया

श्री खजराना गणेश (इंदौर)

मंदिर का निर्माण सन 1735 में होल्कर घराने की महारानी श्री अहिल्या बाई होल्कर ने करवाया था मंदिर की प्राचीन प्रतिमा मंदिर पंडित मंगल भट्ट को सपने में दिखी थी और आज के मंदिर के स्थान के बिलकुल सामने खुदाई करने पर मिली थी। मंदिर परिसर में मूर्ति मिलने वाले स्थान पर आज भी वह कुंड स्थित है जहां से मुर्ति मिली थी।

श्रीमंत दगडू सेठ हलवाई गणेश मंदिर (पुणे)

मंदिर का निर्माण सन 1893 पुणे महाराष्ट्र में मिठाई की दुकान चलने वाले दगडू सेठ ने करवाया था श्रीमंत दगडू सेठ हलवाई गणेश मंदिर मंदिर बनवाने वाले दगडू सेठ के नाम से ही जाना जाता है। मंदिर में गणेश जी की मूर्ति रत्न एवं सोने के आभूषणों से सुसज्जित है।

कानिपकम विनायक मंदिर, चित्तूर

कानिपकम विनायक मंदिर, चित्तूर आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में तिरुपति से लगभग 75 किलोमीटर दूर स्थित है और मंदिर का निर्माण 11 वीं शताब्दी में चोल राजा कुलोथिंग्स चोल ने करवाया था। यह बहुत ही खूबसूरत मंदिर है, यहाँ को गणेश जी की मूर्ति है ओके माथे पर तीन रंग होते हैं, सफेद, पीला और लाल। ब्रह्मोत्सवम इस मंदिर का मुख्य त्योहार है, जिसे हर साल विनायक चतुर्थी के दौरान मनाया जाता है।

मनाकुला विनायक मंदिर, पांडुचेर्री

मनकूला विनायक मंदिर के बारे में मन जाता है की इसका निर्माण १६६६ साल पहले उस समय हुआ था जब पांडुचेर्री फ्रांसीसी शासकों के अधीन आता था। ऐसा कहा है की इस मंदिर पर स्थित गणेश प्रतिमा को कई बार समुद्र में फेंका गया लेकिन रोज मुर्ति उसी स्थान पर दिखाई देती थी। मंदिर की इमारत का नाम एक तालाब (कुलम) के नाम पर रखा गया है, जो समुद्र के किनारे से बहती रेत के साथ मंदिर के अंदर स्थित हुआ करता था।मंदिर में एक हाथी है, जिसे आगंतुक को अपनी सूंड उनके सिर पर रख कर आशीर्वाद देता है।

त्रिनेत्र गणेश मंदिर, रणथंभौर, राजस्थान

त्रिनेत्र गणेश मंदिर, रणथंभौर के ऐतिहासिक 1000 साल पुराने किले के ऊपर स्थित है।यह बहुत ही लोक प्रिय मंदिर है जहाँ दूर दूर से श्रद्धालु त्रिनेत्र गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आते हैं। यहाँ के बारे में मान्यता है की भगवान कृष्ण और रुक्मणी के विवाह का निमंत्रण त्रिनेत्र गणेश मंदिर बेजा गया था और तभी से लोग अपनी शादी का निमंत्रण भगवान को भेजते हैं। त्रिनेत्र गणेश मंदिर, रणथंभौर लगभग 6500 साल पुराना है।

मोती डूंगरी गणेश मंदिर, जयपुर

18 वीं शताब्दी में सेठ जय राम पालीवाल ने मोती डूंगरी गणेश मंदिर का निर्माण करवाया था। राजमाता गायत्री देवी का एक महल ‘मोती डूंगरी पैलेस’ मंदिर के आसपास के क्षेत्र में भी स्थित है। मोती डूंगरी गणेश मंदिर जयपुर के सबसे प्रसिद्ध पर्यटक आकर्षणों में से एक है। इस मंदिर में बहुत ही सुन्दर नक्काशी का काम देखने को मिलता है जो पर्यटकों, इतिहास प्रेमियों और कला प्रेमियों को अपनी और आकर्षित करता है।

गणपति पुळे

गणपति पुळे महाराष्ट्र के कोंकण तट पर रत्नागिरी जिले में स्थित एक छोटा सा शहर है। चिपलून शहर इसके उत्तर में स्थित है। और यहीं स्थितः श्री गणपतिफुले मंदिर जो की एक स्वयंभू गणेश का मंदिर है। ऐसा कहा जाता है की हजारों वर्षों पूर्व श्री गणेश की मूर्ति मिट्टी से ऊग आई और उसी स्थान पर आज गणेश जी का गणपतिफुले मंदिर है।

यहाँ देवता की मूर्ति पश्चिम मुखी है, भारतीय मंदिरों में देवताओं के विपरीत, जो पूर्व का सामना करते हैं। ऐसा मन जाता है की श्री गणपतिफुले पश्चिमी द्वार से आने वाली विपदाओं से सब की रक्षा करते हैं । गणपतिफुले मंदिर मुंबई से 375 किलोमीटर दक्षिण में है और कोंकण तट के साथ सबसे शानदार समुद्र तटों में से एक है – एक रमणीय पलायन जो शांति चाहने वालों, समुद्र तट प्रेमियों और तीर्थयात्रियों को समान रूप से आकर्षित करता है।

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