श्री गणेश से जुड़ी 11 पसंदीदा बातें

श्री गणेश से जुड़ी 11 पसंदीदा बातें

हम सभी अपने प्यारे विघ्नहर्ता गजानन्द को कई नामों से पुकारते हैं जैसे गजानन, विनायक, लंबोदर, गणपति, भालचन्द्र,  सिद्दिविनायक , श्री गणेश की बात ही निराली है। हर भक्त इनसे इतना जुड़ाव और अपनत्व महसुस करता है की जो नाम उसे अच्छा लगता है प्रेम और श्रद्धा से उसी नाम से बुलाता है। जानते हैं श्री गणेश से जुड़ी 11 दिलचस्प बातें…

 

1.प्रिय रंग लाल व सिंदूरी। 

2. विशेष लगाव दूर्वा के प्रति। 

3. इनका वाहन दिनक नमक चूहा है। 

4. बुद्विमत्ता, लेखन इनकी विशेषता है। 

5. लाल रंग के पुष्प से शीघ्र खुश होते हैं।

6. श्री गणेश को प्रथम पूज्य देव का स्थान प्राप्त है।

7. पूर्व दिशा अच्छी लगती है और दक्षिण दिशा की ओर मुंह करना पसंद नहीं है।

8. गणपति का जन्म भाद्रप्रद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को दोपहर 12 बजे हुआ था और इसलिए चतुर्थी तिथि इनकी प्रिय तिथि है।

9. समृद्धि और वैभव के देवता हैं और शुभ लाभ इनके पुत्रों के नाम हैं।  

10. सिंदूर व शुद्ध घी की मालिश इनको प्रसन्न करती है। 

11.गृहस्थाश्रम के लिए ये आदर्श देवता हैं। कामना को शीघ्र पूर्ण कर देते हैं।

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आमंत्रण
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कहाँ कहाँ जायेंगे
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हनुमान


श्री हनुमान चालीसा

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श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमनु मुकुरु सुधारि
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बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार



हनुमान जी की आरती

आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

जाके बल से गिरिवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके।।


श्री शनि देव

Jagannathv
शनि चालीसा

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जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज ।करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥

Jagannathv
शनि कवचं

अथ श्री शनिकवचम्
अस्य श्री शनैश्चरकवचस्तोत्रमंत्रस्य कश्यप ऋषिः IIअनुष्टुप् छन्दः II शनैश्चरो देवता II शीं शक्तिः II शूं कीलकम् II शनैश्चरप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः IIनिलांबरो नीलवपुः किरीटी गृध्रस्थितस्त्रासकरो धनुष्मान् II

श्री राम

Jagannathv

श्री राम चालीसा

श्री रघुवीर भक्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
निशिदिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहिं होई॥1॥
ध्यान धरे शिवजी मन माहीं। ब्रह्म इन्द्र पार नहिं पाहीं॥
दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहूं पुर जाना॥2॥

Jagannathv

आरती श्री राम जी

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।
नव कंज लोचन, कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन
कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्।
पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचि