श्री गणेश द्वारा जीवन के कुछ मूल मन्त्र

( Click here for English )

deva shree ganesha

१. ध्यान हमेशा लक्ष्य पर –
ध्यान हमेशा लक्ष्य पर केंद्रित रखें। जीवन में जब हम लक्ष्य के ओर बढ़ेंगे तो बाधाएं तो आयेंगी ही लेकिन लक्ष्य की ओर हमारी द्रष्टि पर कभी बदल नहीं आने चाहिए। किसी भी कारण से हमें लक्ष्य के मार्ग से हटना नहीं होगा सिर्फ बढ़ना होगा अपनी पूरी ताकत से।

२. सुने – 
बोलने से ज़्यादा सुनना आवश्यक है क्यूंकि इससे हमें वो पता चलता है जो हमे नहीं पता है। सुनने से हमें दूसरों के अनुभवों के बारे में पता चलता है जो की हमारे लिए सीख हो सकते हैं , बड़ो की बातें सुनने से हमे ज्ञान प्राप्त होता है, मूर्खों को सुनने से हमें क्या नहीं करना और बोलना चाहिये यह पता चलता है, अपने से उम्र में छोटो की बात सुनने से हमें नये विचारों की प्राप्ति होती है, बुद्धिमानों को सुनने से बुद्धि बढ़ती है। और अपने अंदर की आवाज़ को सुनने के लिए भी सुनना ज़रूरी है।

३. आध्यात्मिकता – 
आध्यात्मिकता के आकाश को छूने की कोशिश करें क्यूंकि इसकी कोई सीमा नहीं है। हमेशा खुला दिमाग रखें और अपने मानसिक विकास के लिए काम करें, परिवर्तनों को स्वीकार करें क्यूंकि ये ही श्रिष्टि का नियम है, अनुभवों से हासिल ज्ञान जीवन को एक पाठ की तरह देखने और तनाव पर विजय प्राप्त करने में मदद करेगा, आध्यात्मिक के विस्तार से आंतरिक शांति का मार्ग प्रशस्त होगा।

४. मौन को अपनायें – 
मौन रहना कठिन है क्यूंकि समाज में हमें अपने आप को सही गलत सिद्ध करने के लिए बोलना होता है। लेकिन मौन की शक्ति को और ध्वनि से एक बार परिचय हो जाये तो इससे दूर रहना कठिन है। मौन वो शास्त्र है जिसकी कोई काट नहीं है, मौन व्यक्ति को आध्यात्मिक, मानसिक और शारीरिक रूप से शक्तिशाली बनता है। शास्त्र कहते हैं जहां शब्द समाप्त होते हैं, सत्य शुरू होता है। गौतम बुद्ध ने आत्मज्ञान प्राप्त करने के लिए मौन का सहारा लिया था। मौन स्वर्ण है।

deva shree ganesha
deva shree ganesha

deva shree ganesha deva shree ganesha

५. नि: स्वार्थ बनो –
स्वार्थ से नाता तोड़ो और नि: स्वार्थ से नाता जोड़ो। आप जितना हो सके दूसरों की मदद करें क्यूंकि आपकी मदद स्वयं श्री गणेश करेंगे। अगर बीज़ स्वार्थी हो जाये तो इस दुनिया का पहिया ही रुक जाये, धरती बिना स्वार्थ के सब कुछ दिये जा रही है और मनुष्य सिर्फ लिए जा रहा है। इस व्यवस्था को बदलना होगा।

६. कर्म और स्वीकार –
केवल कर्म करने पर ध्यान दें और जो भी फल हो उसे स्वीकार करें। मनुष्य की आदत होती है फल के बारे में अनुमान लगाना। हर व्यक्ति अपनी इच्छा अनुरूप फल की कामना करता है और इच्छा अनुरूप फल न मिलने पर दुखी होता है। अगर सफलता कुछ देती है तो असफलता कुछ सिखाती है। लेकिन मनुष्य अपने अनुमानित फल की आस में असफलता के दिए पाठ की अनदेखी करता है और दुखी होता है। बिना परिणाम के किया कर्म और कर्म का जो भी परिणाम हो उसको स्वीकारना ही आत्म शान्ति की कुंजी है।

७. आप सबसे ज़्यादा शक्तिशाली हैं – 
सबसे बड़ी समस्या भी हम हैं और समाधान भी हम ही हैं। हम खुद को कमज़ोर समझते हैं इसलिए कमज़ोर बन जाते हैं और जब आत्मविश्वास से आगे बढ़ते हैं तो सारी बाधाओं को पार कर जाते हैं। माने तो हम सबसे ज़्यादा शक्तिशाली हैं और ना माने तो सबसे ज़्यादा बेचारे। संसाधनों को दोष देना की कम थे नहीं थे गलत है। सफलता या जीत कभी संसाधनों के बारे में नहीं है बल्कि हमारे बारे में है। हम शक्तिशाली आत्मा हैं और अगर हम समस्या के बजाय समाधान पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो दुनिया में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे हम प्राप्त नहीं कर सकते हैं।

८. जैसा हम देखियेंगे वैसे माने जायेंगे –  deva shree ganesha
अगर हमे अच्छा दिखना है तो हमे अच्छा व्यवहार अपनाना होगा। सुखद शब्द, कोमल शिष्टाचार, एक उज्ज्वल मुस्कान और सभी से अच्छा व्यवहार किसी को भी हमारे प्रति आकर्षित करेगा। इसके विपरित अगर हम बुरे शब्दों का प्रयोग करेंगे, लड़ेंगे – झगड़ेंगे, गन्दे रहेंगे तो सभी हमसे दुरी रखने की कोशिश करेंगे। मिठास हमारे सहज स्वभाव में अंतर्निहित है हमे बस उसको अपनाना है और आचरण में लाना है।

९. विश्वास रखें –  deva shree ganesha
अपने विश्वास को डगमगाने ना दें। विश्वास रखें श्री गणेश में, विश्वास रखें अपने कर्म में , विश्वास रखें अपने आप पर बाकि सब कुछ सृष्टि पर छोड़ दें। जो कुछ भी आपके लिए उप्युक्त होगा वो आपको मिल जायेगा। सिर्फ विश्वास से बढ़ें और परिणाम की चिंता छोड़ दें।

Comments

Write a Reply or Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *





Related Posts