श्री गणेश के कटे सिर का मंदिर

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श्री गणेश के कटे सिर का मंदिर

– पाताल भुवनेश्वर गुफा मंदिर
– पिथौरागढ़ गंगोलीहाट
– उत्तराखंड

90 फीट गहरी और 160 मीटर लंबी गुफा या कहें गुफ़ाओं की श्रृंखला। ऐसा मना जाता है की यहाँ गणपति का सिर जो की पहले मानव का था आज भी निवास करता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार त्रेता योग में सूर्य वंशज अयोध्या का राजा ऋतुपर्ण पाताल भुवनेश्वर गुफा तक पहुँचने वाला पहला मानव था। एक बार राजा ऋतुपर्ण के मित्र राजा नल ने उनसे छिपने में मदद करने का आग्रह किया। ऋतुपर्ण उसे हिमालय के जंगलों में ले गए और छिपने के लिए कहा।राजा नल को छोड़ क्र वापस आते हुऐ उन्हें एक बहुत ही सूंदर हिरण दिखाई दिया, पर काफी पिछा करने पर भी वो राजा के हाथ नहीं आया।

श्री गणेश के कटे सिर का मंदिर
श्री गणेश के कटे सिर का मंदिर

थक कर राजा एक पेड़ के निचे आराम करने लगा। उठने पर राजा ऋतुपर्ण ने खुद को एक गुफ़ा के पास पाया और अंदर जाने पर शेषनाग के दर्शन हुऐ। और अंदर जाने पर राजा ऋतुपर्ण को भगवान शिव और बाकि ३३ कोटि देवी देवताओं के दर्शन हुऐ। द्वापर युग में पांडवों ने पाताल भुवनेश्वर गुफा में शिव के दर्शन किये और कलयुग में जगत गुरु शंकराचार्य ने ७२२ ईस्वी में पाताल भुवनेश्वर गुफा में पदार्पण किया और उन्होंने ही यहाँ ताम्बे का शिवलिंग स्थापित किया। पाताल भुवनेश्वर गुफा मान्यता है की जब क्रोध में आकर शंकर जी ने गणपति का सिर धड़ से अलग कर दिया था तो उन्होंने अलग करे धड़ को पाताल भुवनेश्वर गुफा में ही ला कर रखा था।

श्री गणेश के कटे सिर का मंदिर
श्री गणेश के कटे सिर का मंदिर

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में गंगोलीहाट से 14 किलोमीटर दूर, एक गाँव है, भुवनेश्वर। पाताल भुवनेश्वर गुफा तक पहुंच पाना काफी कठिन है। पाताल भुवनेश्वर गुफा ९० फीट गहरी है और १६० मीटर लम्बी है, गुफा में जाने की कठिनाईयओं के कारण कई भक़्त बीच से बिना दर्शन किये वापस चले जाते हैं। लेकिन पुराणों के अनुसार पाताल भुनेश्वर के अलावा और कोई ऐसा स्थान नहीं जहाँ एकसाथ चारों धाम के दर्शन होतें हों।

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