शिवपुराण के मुताबीक शंकर भगवान की मुंडमाला का रहस्य

हिंदू धर्म में भगवान और देवता सजे हुए व आभूषण पहने हुए दिखाए गए हैं। वही एक देवों के देव महादेव ऐसे भी हैं जो अपने अलग ही स्वरूप के लिए जाने जाते हैं। भगवान शिव का रूप-स्वरूप रहस्यमय माना जाता है। वह भिन्न प्रकार की वस्तुओं को खुद पर धारण करते हैं। शिव के ऐसे स्वरूप के खास मायने भी हैं। शिवपुराण के अनुसार भगवान शिव जो कुछ भी अपने शरीर पर धारण करते हैं, उसके पीछे कोई न कोई रहस्य छिपा है। शिव त्रिशूल, जटा, नाग, चंद्रमा, मुंडमाला आदि धारण करते हैं।

मुंडमाला इस बात का प्रतीक है कि शिव ने मृत्यु को वश में किया हुआ है। पुराणों के अनुसार यह मुंडमाला शिव और सती के प्रेम की भी प्रतीक है। शिव ने ही सती माता को मुंडमाला पहनने का राज बताया था। शिव के गले में पड़ी यह माला 108 सिरों की हैं। 

शिवपुराण के मुताबीक शंकर भगवान की मुंडमाला का रहस्य
शिवपुराण के मुताबीक शंकर भगवान की मुंडमाला का रहस्य

एक बार नारद मुनि ने सती माता से पूछा कि माता शंकर भगवान अगर आपको सबसे अधिक प्रेम करते हैं तो उनके कंठ पर मुंडों की माला क्यों रहती है? नारद मुनि के उकसाने पर सती माता ने शिवजी से हठ करके माला का रहस्य जानना चाहा। 

काफी समझाने पर सती नहीं मानी तो शिव ने उन्हें बताया कि इस मुंड माला में सभी सिर आपके ही हैं। शिवजी ने कहा कि यह आपका 108 वां जन्म है। पहले भी आप 107 बार जन्म लेकर शरीर त्याग चुकी हैं। ये मुंड उन्हीं जन्मों का प्रतीक हैं।

शिवपुराण के मुताबीक शंकर भगवान की मुंडमाला का रहस्य
शिवपुराण के मुताबीक शंकर भगवान की मुंडमाला का रहस्य

मुंडमाला पहनने का रहस्य जानकर सती माता ने शिव से कहा कि मैं तो बार-बार शरीर का त्याग करती हूं लेकिन आप तो त्याग नहीं करते तब शिव ने उनसे कहा कि मुझे अमरकथा का ज्ञान है, इसलिए मुझे बार-बार शरीर का त्याग नहीं करना पड़ता है। 

सती ने भी शिव से अमरकथा सुनने की इच्छा प्रकट की। इस पर जब शिव सती को कथा सुना रहे थे तब बीच में ही माता की नींद लग गई इस कारण वो पूरी कथा नहीं सुन पाईं। और वो अमर नहीं हो सकीं और उन्होने अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ में कूद कर आतम हत्या कर ली ।

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