लालबागचा राजा


lalbaugcha raja

लालबाग के राजा, गणेश सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पुरे विश्व में सबसे प्रसिद्द गणेश प्रतिमा है। लालबाग 1934 में स्थापित किया गया था, और तभी से यहाँ गणेश चतुर्थी के अवसर पर गणेश भक्तों की भिड़ उमड़ रही है।

और सिर्फ उमड़ ही नहीं हर वर्ष यहाँ आने वालों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की जाती रही है। 1935 से कांबली आर्ट्स का कांबली परिवार लालबाग के राजा की मूर्ति बना रहा है और इसकी पौराणिक डिजाइन अब पेटेंट-संरक्षित है। गणेश चतुर्थी के 10 दिनों में औसतन 15 लाख लोग हर दिन लालबाग के राजा के दर्शन करने पहुँचते हैं। यहाँ आने वाले सभी भक्तों मानना है की लालबाग के राजा, गणेश उनकी इच्छाओं को पूरा करेंगे, सभी न्यूज़ पेपर और टीवी चैनल लालबाग के राजा का बराबर कवरेज देते हैं।

लालबाग के राजा के दर्शन के लिए 2 लाइन होती है एक सामान्य मुख दर्शन रेखा और विशेष नव चरन दर्शन दर्शन जो लोग व्रत करना चाहते हैं या मनोकामना पूरी करते हैं (नवस) और मूर्ति के चरण स्पर्श करते हैं। नव दर्शन लाइन भक्तों को मूर्ति के पैरों के ठीक सामने ले जाती है, जबकि मुख दर्शन रेखा लगभग 10 मीटर की दूरी से दर्शन (दर्शन) प्रदान करती है। लालबाग के राजा के दर्शन करने की लिए फ़िल्मी हस्तियां, बड़े व्यापारी, खेल जगत के सितारे, नेता सभी लोग आते हैं।

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हनुमान जी की आरती

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Jagannathv
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अथ श्री शनिकवचम्
अस्य श्री शनैश्चरकवचस्तोत्रमंत्रस्य कश्यप ऋषिः IIअनुष्टुप् छन्दः II शनैश्चरो देवता II शीं शक्तिः II शूं कीलकम् II शनैश्चरप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः IIनिलांबरो नीलवपुः किरीटी गृध्रस्थितस्त्रासकरो धनुष्मान् II

श्री राम

Jagannathv

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श्री रघुवीर भक्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
निशिदिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहिं होई॥1॥
ध्यान धरे शिवजी मन माहीं। ब्रह्म इन्द्र पार नहिं पाहीं॥
दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहूं पुर जाना॥2॥

Jagannathv

आरती श्री राम जी

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।
नव कंज लोचन, कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन
कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्।
पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचि