रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग

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रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग

 

रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग 
रामेश्वरम द्वीप,
तमिलनाडु 
शिव जी के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग। इस मंदिर की वास्तुकला देखते ही बनती है। दक्षिण भारत में मंदिरों के सामान रामेश्वरम मंदिर भी चारो तरफ बड़ी से दिवार से घिरा हुआ है और दो तरफ गोपुरम हैं। मंदिर के अंदर काफ़ी लंबे गलियारे है जो की सुंदरता और अध्बुध वास्तुकला का नमूना है।

मंदिर के अंदर ५ फुट ऊँचा ओटला बना कर बड़े-बड़े खंबे यथार्थता से लगाए गए है। मंदिर परिसर में ही २२ मिठे पानी के कुंड हैं और ऐसा मन जाता है के ये २२ कुंड भारत २२ की पवित्र नदियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग
रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग

पुराणों के अनुसार मंदिर में स्थापित दोनों शिव लिंगो के पीछे कहानी है। श्री राम जब लंका से रावण को युद्ध में हरा कर भारत वापस आये तो उन्होंने रामेश्वरम में शिव जी की पूजा कर अपने द्वारा युद्ध में किये गए पापों की क्षमा मांगने के लिए पूजा रखने का विचार किया। इसके लिए उन्हें शिव लिंग की आव्यशकता थी तो हनुमान जी को शिव लिंग लिए भेजा गया। हनुमान जी को आने में देर होती देख सीता जी ने मिटटी और रेत से मिला कर शिवलिंग का निर्माण किया। 

जब हनुमान जी वापस आए तो देखकर दुखी हुऐ की उनके द्वारा लाये गए शिवलिंग का होगा। श्री राम यह निर्देश दिया की हनुमान जी द्वारा लाये गए शिवलिंग की पूजा पहले की जाये और तभी से यह परम्परा मंदिर में जारी है। सीता जी द्वारा निर्मित शिवलिंग को रामलिंगम कहा जाता है और हनुमान जी द्वारा लाए शिवलिंग को विश्वलिंगम कहा जाता है।

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