मन्त्र ‘ओम गाम गणपतयै नमः’ का उपयोग

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मन्त्र ‘ओम गाम गणपतयै नमः’ का उपयोग किसी भी नए कार्य जैसे की व्यवसाय, गृह प्रवेश, यात्रा, परिक्षा , एक नए दिन के आरंभ या किसी भी प्रकार के नए कार्य की शुरुवात में किया जाता है। 

हिन्दू धर्म में गणेश को प्रथम पुज्य का स्थान दिया गया है और ऐसा मन जाता है की मन्त्र ‘ओम गाम गणपतयै नमः’ के साथ की गयी शरुवात आने वाली संभावित कठिनाइयों से बचती है और आगे सफलता का रास्ता प्रशस्त करती है। 

यह मंत्र गणेश, प्रसिद्ध देवता और ’बाधाओं का स्वामी’ का आह्वान करता है। 

श्री गणेश को विघ्नहर्ता (बाधाओं से बचने वाला), सिद्धि विनायक (मनोकामना पूरा करने वाले), यशस्विनी (लोकप्रिय बनाने वाले), सर्वसिद्धांत (कौशल और बुद्धि के दाता) गणपति को द लॉर्ड ऑफ बिगिनिंग्स, द रिमूवर्स ऑफ ऑब्स्ट्रक्टल्स और द डेस्ट ऑफ गुड फॉर्च्यून के रूप में भी जाना जाता है। 

श्री गणेश की तस्वीर या मूर्ति जिस जगह राखी जाती है वहाँ आसपास सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और साथ ही मन्त्र ‘ओम गाम गणपतयै नमः’ के उपयोग से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह कई गुना बढ़ाया जा सकता है

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