त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग

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त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग
नासिक 
महाराष्ट्र 
त्र्यंबकेश्वर के बारे में ऐसा बोला जाता हो है की एक बार महर्षि गौतम की पत्नी से किसी बात पर नाराज हो कर बाकि सारे ब्राह्मणों से श्री गणेश को प्रसन्न कर उनसे माँगा की वे किसी भी प्रकार से महर्षि गौतम और उनकी पत्नी को तपोवन से बाहर निकल दें। 

गणेश जी ने सभी को काफी समझाया की ये गलत होगा पर वे लोग नहीं माने।अपने दिये वचन से विवश हो कर श्री गणेश ने एक दुर्बल गाय का रूप धारण किया और महर्षि गौतम के खेत में चरने लगे।

गाय को फसल ख़राब करते देख महर्षि गौतम ने एक लकड़ी लेकर गाय को खेत से बाहर करना चाहा, किंतु उनके पास पहुँचते ही गाय गिर कर मर गयी।  यह देख बाकि सभी ब्राह्मण इखट्टा हो गए और महर्षि गौतम को पत्नी साथ आश्रम छोड़ने पर विवश कर दिया। साथ ही गो हत्या के प्रायश्चितके लिए कुछ ना पूरी हो पाने वाली शर्तें रख दी। 

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग

महर्षि गौतम ने फिर भी सारी कार्यो को पूरा किया और उसके बाद शिव आराधना में जुट गए, शिव जी प्रसन्न हो कर उनके सामने प्रकट हुए और महर्षि गौतम को कुछ भी मांगने को कहा। महर्षि गौतम ने शिव जी से गो हत्या के पाप से प्रायश्चित की माँग की, इस पर शिव जी ने कहा की तुम्हारे साथ छल हुआ है और मै उन ब्राह्मणों को इसकी सजा दूँगा। यह सुन महर्षि गौतम ने शिव जी से कहा की हे ईश्वर उन्हीं के निमित्त से मुझे आपके दर्शन हुऐ हैं आप अगर मुझे कुछ देना कहते हैं तो यहीं मेरे पास रह जाईये।

शिव जी उनकी बात मानकर वहाँ रुक गए और त्र्यम्बक ज्योतिर्लिंग के नाम से स्थित हो गए। गौतमजी द्वारा लाई गई गंगाजी भी वहाँ पास में गोदावरी नाम से प्रवाहित होने लगीं। ऐसा भी कहते हैं की त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग समस्त पुण्यों को प्रदान करने वाला है।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर का पुनर्निर्माण तीसरे पेशवा बालाजी अर्थात नाना साहब पेशवा ने शुरू करवाया था। 31 साल के लंबे समय तक मंदिर के जीर्णोद्धार का काम चला १७५५ से १७८६ तक और तक़रीबन १६ लाख रूपये खर्च किये गए थे।

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