ग्रिशनेश्वर ज्योतिर्लिंग

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ग्रिशनेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर
एलोरा औरंगाबाद,
महाराष्ट्र

ग्रिशनेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के बारे में किंवदंती है की कुसुमा नाम की महिला जो की शिव जी के बहुत विश्वास रखती थी और रोज उनकी पूजा किया करती थी। वह अपनी पूजा के दौरान शिवलिंगम को एक छोटे से कुंड में स्नान कराया करती थी। 

कुसुम का समाज में काफी सम्मान था और सब उसे आदर से देखते थे। कुसुम में समाज में सम्मान और आदर से उसके पति की दुसरो पत्नी तो काफी जलन थी।इस जलन, गुस्से और आक्रोश में, उसने कुसुमा के बेटे की हत्या कर दी।

अपने बेटे की हत्या का पता चलने पर कुसुम बहुत दुखी हूँ गयी पर शिव जी की पूजा अर्चना नहीं छोड़ी, इस दुःख में भी अपने प्रति श्रद्धा देख शिव जी कुसुम के सामने प्रकट हुऐ और कुसुम के बेटे को भी चमत्कारिक रूप से जिवित कर दिया। 

ग्रिशनेश्वर ज्योतिर्लिंग

शिव जी ने गाँव के लोगों को भी दर्शन दिए और कुसुमा के अनुरोध पर ज्योतिर्लिंग ग्रिशनेश्वर के रूप में शिव जी ने उसी स्थान पर स्वयं को प्रकट किया।

ग्रिशनेश्वर शब्द का मतलब है “दया का स्वामी“, ग्रिशनेश्वर ज्योतिर्लिंग एलोरा गुफाओं से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर एलोरा में स्थित है – एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल जो की औरंगाबाद शहर से ३० किलोमीटर की दुरी पर है।

ग्रिशनेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर को मुग़ल साम्राज्य में दिल्ली के सुल्तान ने १३ वीं और १४ वीं शताब्दी के हिंदू-मुस्लिम युद्धों के दौरान नष्ट कर दिया था और बाद में भी कई बार मंदिर पर हमले हुए और कई बार इसका पुनर्निर्माण कार्य गया। 

१८ वीं शताब्दी में मुगल साम्राज्य के पतन के बाद इंदौर की एक हिंदू रानी रानी अहिल्याबाई के प्रायोजन के तहत इसे वर्तमान रूप में फिर से बनाया गया था। यह 240 फीट x 185 फीट मंदिर भारत का सबसे छोटा ज्योतिर्लिंग मंदिर है।

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