क्यों जाते हैं मंदिर के वैज्ञानिक तथ्य ..

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मंदिर जाना हिन्दू धर्म में सदियों से चलन में है। आम धारणा के अनुसार आपको भगवान को अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिये हम मंदिर जाते हैं। किन्तु बहुत काम लोग जानते हैं की मंदिर जाने के पीछे कई सारे वैज्ञानिक काऱण भी हैं।

– सकारात्मक ऊर्जा –

हर मंदिर की संरचना वास्तु के अनुसार होती है। श्री यंत्र (वास्तु उपकरण) किसी भी हिंदू मंदिर से प्रेरणा लेकर बनाया गया है।  मंदिर इस तरह से बनाए गए हैं कि उनमें सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह हो। यह शक्तिशाली सकारात्मक ऊर्जा व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ बनाने में मदद करती है।

– उच्च रक्तचाप की समस्या कंट्रोल –

मंदिर के अंदर नंगे पाँव चलने से पैरों में मौजूद प्रेशर प्वाइंट्स पर दवाब भी पड़ता है, जिससे उच्च रक्तचाप की समस्या कंट्रोल होती है  और मंदिर में प्रहावित सकरात्मत ऊर्जा पैरों के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश करती है।

मंदिर में जो माथे पर भौंह के बिच में तिलक लगाया जाता है उससे हमारे दिमाग के ख़ास हिस्से पर दवाब पड़ता है। इससे कॉन्सेंट्रेशन बढ़ता है। 

– रिसर्च कहती है, जब हम मंदिर का घंटा बजाते हैं, तो 7 सेकण्ड्स तक हमारे कानों में उसकी आवाज़ गूंजती है। इस दौरान शरीर को सुकून पहुंचाने वाले 7 प्वाइंट्स एक्टिव हो जाते हैं। इससे एनर्जी लेवल बढ़ाने में हेल्प मिलती है।

मंदिर में हाथ जोड़ने से उँगलियों के कुछ विशेष पॉइंट्स पर दबाव बढ़ता है, जो की बड़ी के कई अंगों से जुड़े होते है और शरीर के इन अंगों कार्य सुधरते हैं। 
– हवन और कपूर का धुआं बैक्टीरिया ख़त्म करता है। इससे वायरल इंफेक्शन का खतरा टलता है। 
– मंदिर की सकारत्मक ऊर्जा और शंख की ध्वनी दिमाग को शांत करती है और इससे तनाव काम होता है।

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