काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग – काशी (वाराणसी / बनारस)


काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग 

काशी (वाराणसी / बनारस) उत्तर प्रदेश 

पुरे विश्व में शिव जी सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक, सबसे ज़्यादा पवित्र माना जाने वाला शंकर मंदिर, हर हिन्दू की अपार श्रद्धा और आस्था का केन्द्र श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग। ऐसा बोला जाता है ही काशी नगर में जो मृत्यु को प्राप्त होता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है इसलिए इसे मोक्षधाम भी कहते हैं। कहते हैं की काशी शंकर जी के त्रिशूल पर विराजमान है और उनके केश से बहने वाली गंगा भी यँहा इस नगर से हो कर गुजरती है। कहते हैं गंगा में स्नान कर गंगा का जल विश्वनाथ पर अर्पित करने से मोक्ष पाया जा सकता है। 

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग
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काशी विश्वनाथ मंदिर को कई बार आक्रमणों का सामना करना पड़ा और कई शासकों ने मंदिर को नुकसान पहुँचाया।औरंगज़ेब ने भी मंदिर को ध्वस्त किया था और वहाँ ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण किया था। रिकॉर्ड के अनुसार मंदिर 1490 में पाया गया था। वर्तमान संरचना 1780 में इंदौर के मराठा शासक अहिल्या बाई होल्कर द्वारा बनाई गई थी। मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण के काशी खंड सहित पुराणों में देखा जा सकता है। यह माना जाता है कि जब पृथ्वी का निर्माण किया गया था तो काशी पर प्रकाश की पहली किरण पड़ी थी। ऐसी किंवदंतियाँ हैं जो मानती हैं कि शिव वास्तव में कुछ समय के लिए यहाँ रुके थे। शिव को शहर और उसके लोगों के संरक्षक माना जाता है।

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घूमतेगणेश की जानकारी

आमंत्रण
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घूमते गणेश आयोजन में मंगलमूर्ति श्रीगणेश को आमंत्रित करने के लिए यजमान को शहर के बंधू बांधवो को आमंत्रित करना होगा ताकि अधिक से अधिक लोग आशीर्वाद ले सके साथ ही गणराज भी भक्तो की भीड़ से आनंदित हो उठे , तीन दिनों के इस आयोजन में विघ्हर्ता के सिंहासन को सजा कर , भक्तो और गणपति.......


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घूमते गणेश आयोजन के तहत मंगलमूर्ति गणराज अपने भक्तों के आमंत्रण पर उनके आयोजनों में सम्मिलित होंगे, जैसे शादी, फैक्ट्री का शुभ आरंभ, नये व्यव्साय का आरम्भ या कोई और शुभ अवसर और अपने आशीर्वाद से उस आयोजन को अभूतपूर्व बनाएंगे और सफलता का आशीर्वाद प्रदान करेंगे।.........


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हनुमान


श्री हनुमान चालीसा

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श्रीगुरु चरन सरोज रज, निजमनु मुकुरु सुधारि
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बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार



हनुमान जी की आरती

आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।

जाके बल से गिरिवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके।।


श्री शनि देव

Jagannathv
शनि चालीसा

॥दोहा॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल ।दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज ।करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज ॥

Jagannathv
शनि कवचं

अथ श्री शनिकवचम्
अस्य श्री शनैश्चरकवचस्तोत्रमंत्रस्य कश्यप ऋषिः IIअनुष्टुप् छन्दः II शनैश्चरो देवता II शीं शक्तिः II शूं कीलकम् II शनैश्चरप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः IIनिलांबरो नीलवपुः किरीटी गृध्रस्थितस्त्रासकरो धनुष्मान् II

श्री राम

Jagannathv

श्री राम चालीसा

श्री रघुवीर भक्त हितकारी। सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
निशिदिन ध्यान धरै जो कोई। ता सम भक्त और नहिं होई॥1॥
ध्यान धरे शिवजी मन माहीं। ब्रह्म इन्द्र पार नहिं पाहीं॥
दूत तुम्हार वीर हनुमाना। जासु प्रभाव तिहूं पुर जाना॥2॥

Jagannathv

आरती श्री राम जी

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।
नव कंज लोचन, कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम्॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन
कन्दर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्।
पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचि