ओंकारेश्वर मंदिर

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ओंकारेश्वर मंदिर

 

ओंकारेश्वर मंदिर 
ओंकारेश्वर,
खंडवा जिला,
मध्य प्रदेश 
पौराणिक कथा अनुसार विंध्याचल पर्वत श्रृंखला के देवता विंध्य अपने पापों से मुक्ति लिये शिवजी की आराधन कर रहे थे।

उन्होंने पूजा के लिए यह रेखा-चित्र और रेत मिटटी से शिव लिंग बनाया। शिव जी उनकी पूजा से काफी प्रसन्न हुऐ और दो रूपों ओंकारेश्वर और अमलेश्वर में प्रकट हुऐ। रेत मिटटी से बना लिंग ओम के सामान दिखता था इसलिए उस द्विप को ओंकारेश्वर के नाम से जाना जाने लगा।  ओंकारेश्वर द्विप पवित्र नदी नर्मदा के बिच बना हुआ है और यहाँ के शिव मंदिर में माता पार्वती और पंच मुखी गणपति जी की भी मूर्तियाँ देखि जा सकती हैं। 

ओंकारेश्वर मंदिर

एक और कहानी के अनुसार इक्ष्वाकु वंश अर्थार्थ भगवान राम में वंश के राजा मान्धाता ने यहाँ शिव जी की पूजा की और उनसे प्रसन्न हो कर शिव जी स्वयं ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुऐ और इसलिए पहाड़ का नाम मंधाता पड़ा।  ओंकारेश्वर को वह स्थान भी कहा जाता है जहाँ श्री आदि शंकराचार्य अपने गुरु गोविंदपाद से एक गुफा में मिले थे। यह गुफा आज भी ओंकारेश्वर शिव मंदिर के ठीक नीचे है और यहाँ आदि शंकराचार्य की प्रतिमा स्थापित की गई है।

ओंकारेश्वर में भगवान शिव के दो मुख्य मंदिर हैं, एक ओंकारेश्वर जो की ओंकारेश्वर द्वीप पर मान्धाता पहाड़ पर स्थित है और एक अमरेश्वर जो की की मुख्य भूमि पर नर्मदा नदी के दक्षिणी तट पर स्थित है।

ओंकारेश्वर मंदिर
ओंकारेश्वर मंदिर

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