आयोजन
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घूमते गणेश आयोजन(ayojan) में मंगलमूर्ति श्रीगणेश को आमंत्रित करने के लिए यजमान को शहर के बंधू बांधवो को आमंत्रित करना होगा ताकि अधिक से अधिक लोग आशीर्वाद ले सके।

साथ ही गणराज भी भक्तो की भीड़ से आनंदित हो उठे , तीन दिनों के इस आयोजन में विघ्हर्ता के सिंहासन को सजा कर , भक्तो और गणपति महाराज के भंडारे का आयोजन करना होगा।vinayak

दिन 1 

सुबह 

– आगमन – श्री घुमतेगणेश का आगमन भव्य यात्रा में भक्तों के साथ होगा। श्री घुमतेगणेश एक बहुत ही सुन्दर फूलों से सुसज्जित वाहन में विराजमान होंगे, जुलुस में भक्तों के आलावा ढोल ताशे वाली पार्टी होगी जो की पूरे रास्ते श्री घुमतेगणेश के आगमन को उत्सव का रूप देगी। जुलुस में पंडितो की एक टोली होगी जो की मंत्रोच्चारण करते हुऐ आगे बढ़ेगी और साथ ही डी जे वाहन भी होगा। फूलों और गुलाल की वर्षा के बीच श्री घुमतेगणेश का आगमन नियित स्थान पर होगा। 
 
– अभिनन्दन  – श्री घुमतेगणेश नियित स्थान पर आगमन होने पर यजमान श्री घुमतेगणेश का स्वागत करेंगे और स्थान ग्रहण करने का आग्रह करेंगे। पारम्परिक मन्त्रोचारण, ढोल ताशे की ध्वनि और डी जे के सुर्रों के साथ श्री घुमतेगणेश स्थापना स्थान की ओर बढ़ेंगे। 
 
– स्थापना – आगमन के पश्चात पुरे विधिः विधान से श्री घुमतेगणेश की स्थापना पुर्व निर्धारित स्थान पर की जाएगी। यजमान उनका परिवार और सभी भक्तों की उपस्थिति में इस आयोजन को किया जायेगा। 
 
– पूजन – स्थापना के पश्चात विधिः विधान और मंत्रो के उच्चारण के साथ श्री घुमतेगणेश की पूजा की जाएगी जिसमे सभी भक्त गण भाग लेंगे।और विभिन प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जायेगा। 
 
– आरती – पूजन की समाप्ति पुरे जोश के साथ भव्य आरती के साथ की जाएगी और भक्तों को इस परम आनंद में भाग लेने का अवसर मिलेगा। 
 
– दर्शन – आरती की समाप्ति के साथ भक्त गण अपने प्रिय श्री घुमतेगणेश का आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे और उनके दर्शन कर सकेंगे। 
 
– प्रसादी – सभी भक्तों को दर्शन के बाद प्रसाद परोसा जायेगा। 
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शाम 

– कथा – शाम को कथा वाचक द्वारा भक्तों के समक्ष श्री गणेश कथा का आयोजन किया जायेगा 
 
– भजन – भजन मंडली द्वारा प्रस्तुति 
 
– पूजन – विधिः विधान और मंत्रो के उच्चारण के साथ श्री घुमतेगणेश की पूजा की जाएगी और विभिन प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जायेगा। 
 
– आरती – पूजन की समाप्ति पुरे जोश के साथ भव्य आरती के साथ की जाएगी और भक्तों को इस परम आनंद में भाग लेने का अवसर मिलेगा। 
 
– दर्शन – आरती की समाप्ति के साथ भक्त गण अपने प्रिय श्री घुमतेगणेश का आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे और उनके दर्शन कर सकेंगे। 
 
– प्रसादी – सभी भक्तों को दर्शन के बाद प्रसाद परोसा जायेगा
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दिन 2

सुबह 

 
– पूजा –
 
– आरती –
 
– दर्शन –
 
– प्रसादी –
 
– हवन – गणेश गायत्री मन्त्र के साथ हवन किया जायेगा इसमें सभी भक़्त जोड़े से भाग ले सकेंगे। 
 

शाम 

 
– जप – गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ आयोजित किया जायेगा 
 
– पूजा –
 
– आरती –
 
– दर्शन –
 
– प्रसादी –
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दिन 3 

 

सुबह 

 
– पूजा –
 
– आरती –
 
– दर्शन –
 
– प्रसादी –
 
– प्रस्थान – तीसरे दिन प्रसादी के बाद थोड़ा समय दर्शन के लिए रखा जायेगा और उसके पश्चात श्री घुमतेगणेश अपने भक्तों से बिदा लेंगे और किसी और भक्त के निमंत्रण पर उसके स्थान के लिए कुछ करेंगे। जैसे की श्री घुमतेगणेश का आगमन बहुत ही भव्य था वैसे ही उनका प्रस्थान भी ढोल ताशों, डी जे , फूल, रंग, गुलाल आदि से आयोजन को यादगार बना देगा। श्री घुमतेगणेश के प्रस्थान पर सभी भक्त उनसे आशीर्वाद प्राप्त करेंगे और उनके बहुत जल्द वापस उनके बिच आने का निवेदन करते हुए श्री घुमतेगणेश को बीदा करेंगे। vinayak vinayak